नागराज मंजुले की ‘सैराट’ में भारत की जाति व्यवस्था पर फोकस किया गया था, वहीं शशांक खेतान की ‘धड़क’ में जाह्नवी और ईशान की लव स्टोरी पर ज्यादा फोकस रखा गया है। फिल्म का क्लाइमैक्स भी सैराट से अलग है। ईशान इससे ज्यादा अच्छी एक्टिंग कर सकते थे। जाह्नवी की एक्टिंग में भी काफी कमियां नजर आईं। खैर जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर की ‘धड़क’, ‘सैराट’ जितनी अच्छी है या नहीं, इसका फैसला दर्शकों को खुद ही थियेटर में जाकर करना होगा।