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Indra Kumar: ‘अक्षय पैंट शर्ट पहनकर कन्हैया बन सकते हैं, तो अजय के सूट पहनकर चित्रगुप्त बनने पर आपत्ति क्यों’

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thank god - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘दिल’, ‘बेटा’, ‘राजा’ और ‘इश्क’ जैसी लगातार चार हिट फिल्मों से अपनी निर्देशन यात्रा शुरू करने वाले निर्माता, निर्देशक इंद्र कुमार इस बात का जिक्र चलने पर खूब खुश होते हैं और कहते हैं कि कि उनका ये रिकॉर्ड सिर्फ निर्देशक राजकुमार हिरानी बेहतर कर पाए, जिनकी पांच फिल्में लगातार हिट रहीं। मुंबई के पांच सितारा होटल सन एंड सैंड में मुलाकात होने पर इंद्र कुमार कहीं से इस बात को लेकर परेशान नहीं दिखते कि उनकी फिल्म पर सोशल मीडिया में सवाल उठाए जा रहे हैं। वह साफ कहते हैं, ‘अगर हमसे कोई गलती हो भी गई है तो हम उसमें सुधार करने को तैयार हैं। लेकिन, मैं अपनी फिल्म ‘थैंक गॉड’ में चित्रगुप्त के सूट बूट में दिखने पर एतराज करने वालों से सिर्फ यही पूछना चाहता हूं कि फिल्म ‘ओ माय गॉड’ में अक्षय कुमार के पैंट शर्ट पहनकर कन्हैया बनने पर उन्होंने एतराज किया था क्या?’
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Indra Kumar - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लिफ्ट छोड़कर जीना चढ़ना सेहत का राज
बतौर निर्देशक इंद्र कुमार की पहली फिल्म ‘दिल’ को रिलीज हुए 32 साल हो चुके हैं और उनके भीतर अब भी वैसा ही जोश और जुनून है। शारीरिक रूप से भी वह बिल्कुल चुस्त दुरुस्त दिखते हैं। होटल की तीसरी मंजिल पर स्थित अपने कमरे तक वह मेरे साथ लॉबी से जीना चढ़कर आ जाते हैं। वह कहते हैं, ‘मैं अपने दफ्तर में भी अक्सर जीना चढकर ही पहुंच जाता हूं। ऐसा मैं व्यायाम की कमी पूरी करने के लिए करता हूं और इससे मुझको खुद को फिट रखने में मदद भी मिलती है क्योंकि मेरा काम ऐसा है कि मैं वर्जिश के लिए अलग से समय बहुत कम निकाल पाता हूं। मैं इस बात के लिए ईश्वर का हमेशा शुक्रिया अदा करता रहता हूं कि उन्होंने मुझे अच्छी सेहत का आशीर्वाद दिया।’

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Thank God - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हमने धन्यवाद कहना ही नहीं सीखा
फिल्म ‘थैंक गॉड’ का जिक्र चलने पर इंद्र कुमार कोरोना संक्रमण काल की तरफ ध्यान ले जाते हैं। वह कहते हैं, ‘कोरोना संक्रमण काल में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसने अपने किसी परिचित, किसी मित्र या किसी रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को नहीं खोया होगा। अब हम उस विकट परिस्थिति के पार आ चुके हैं लेकिन क्या हमने कभी ईश्वर को इस बात के लिए धन्यवाद दिया। हम तो ये मानकर सामान्य जिंदगी जीने में लग गए कि हमको क्या, हम तो अमरत्व का वरदान लेकर आए थे। ऐसा नहीं है, इतनी भीषण महामारी में जीवित बचे रहना ईश्वर के किसी आशीर्वाद से कम नहीं है और इसके लिए हमें ईश्वर को धन्यवाद कहना ही चाहिए। किसी से भी पूछो कि आखिरी बार उसने ईश्वर को धन्यवाद कब कहा था, तो शायद उसे सोचना पड़े।’

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Thank God - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेखकों की जमकर तारीफ की
इंसानी जरूरतों और उनको पूरा करने के लिए होने वाले पाप और पुण्य के हिसाब की कहानी है फिल्म ‘थैंक गॉड’। इस फिल्म की कहानी के लिए इंद्र कुमार अपने लेखकों आकाश कौशिक और मधुर शर्मा को पूरा श्रेय देते हैं और उनकी खूब तारीफ करते हुए बताते हैं, ‘ये कहानी हमने कोरोना संक्रमण काल से पहले ही तैयार कर ली थी, लेकिन फिर बार बार लगते रहे लॉकडाउन के चलते फिल्म की शूटिंग टलती रही। और, थैंक गॉड कि ये फिल्म हम बनाकर अब रिलीज करने को तैयार हो पाए। मैं तो ईश्वर के सामने जब भी होता हूं, कुछ नहीं मांगता हूं। वह हमारे पालनहार हैं तो वह हमारी सारी बातों का ख्याल रखते ही हैं। कोई बेटा अपने पिता से कुछ भी क्यों मांगे, ये तो पिता का धर्म है ना बच्चे का ख्याल रखना। यही मेरा ईश्वर से रिश्ता है, मैं बस मुझे जो कुछ जीवन में मिला उसके लिए उनका धन्यवाद ही करता रहता हूं।’

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Thank God - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मजबूत महिलाओं ने दिया सहारा
इंद्र कुमार की फिल्मों में तब से मजबूत नायिकाओं का सिलसिला चला आ रहा है जब स्त्री सशक्तिकरण पर इतनी न बात होती थी और न ही बहस। इसका श्रेय वह अपनी मां और बहन को देते हैं। वह कहते हैं, ‘मैंने जब से होश संभाला है, अपने आसपास मजबूत महिलाओं को ही पाया है। हम बच्चे थे तो मेरी मां काम पर जाती थी। थोड़ा बड़े हुए और मां का हाथ सिर से उठ गया तो हमारी बहन अरुणा ईरानी ने हमारी परवरिश की। उन्होंने हम सात भाई बहनों को पाला है। इसीलिए जब भी मैं किसी कामकाजी महिला को देखता हूं तो मेरा सिर श्रद्धा से झुक जाता है। मेरे लिए स्त्री शक्ति किसी देवी की तरह है। वह मेरी, मेरे परिवार की और मेरे आसपास की प्रेरणा स्रोत होनी ही चाहिए। फिल्म ‘थैंक गॉड’ में भी रकुल प्रीत का किरदार आत्मनिर्भर है और कहानी को मजबूती देता है।’
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अजय देवगन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अजय देवगन की कॉमेडी का अंदाज निराला
नए जमाने के फिल्म दर्शकों में से कम लोगों को ही पता होगा कि सिर्फ एक्शन या सीरियस फिल्में करने वाले अभिनेता अजय देवगन से उनकी अभिनय यात्रा में पहली बार कॉमेडी इंद्र कुमार ने ही फिल्म ‘इश्क’ में कराई। अजय देवगन का जिक्र चलते ही इंद्र कुमार का चेहरा खिल जाता है। वह कहते हैं, ‘अजय एक बेहतरीन अभिनेता है। आमतौर पर सार्वजनिक जीवन में भी वह गंभीर ही रहता है इसलिए लोग उसे ऐसा समझते हैं। लेकिन, उसकी शख्सीयत का जो दूसरा पहलू है वह बहुत ही दिलचस्प है। उसको हंसने और ठहाके लगाने के लिए एक सही साथ की जरूरत होती है और जब भी वह अपने इस रूप में होता है लोगों को खूब हंसाता है। अजय देवगन की कॉमेडी में एक बात खास और है, और वह ये कि वह दर्शकों को हंसाने के लिए भड़ैती नहीं करता। उसके अभिनय का हास्य रस उसकी संवाद अदायगी की खास शैली से आता है और यही मुझे सबसे ज्यादा पसंद है।’
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रकुल प्रीत सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ट्रोल्स से सीधा सवाल
फिल्म ‘थैंक गॉड’ में अजय देवगन के चित्रगुप्त का किरदार करने के लिए पहने गए सूट बूट के विरोध में सोशल मीडिया पर चले अभियान के बारे में पूछने पर इंद्र कुमार कहते हैं, ‘हमने जब ये फिल्म बनाई तो सच मानिए मुझे नहीं पता था कि चित्रगुप्त भगवान की श्रेणी में आते हैं। लेकिन, अब पता चला कि हमारे समाज का एक वर्ग उनकी पूजा भी करता है। मैं मानता हूं कि हमसे गलती हो सकती है और अगर हमें किसी ने इस तरफ ध्यान दिलाया है तो इसमें सुधार लाने के लिए भी हम तैयार हैं। लेकिन, मेरा सवाल सिर्फ ये है कि एक ही बात के लिए सोशल मीडिया के इन लोगों के अलग अलग पैमाने कैसे हो सकते हैं? अगर अक्षय कुमार को फिल्म ‘ओ माय गॉड’ में लोगों ने पैंट शर्ट में कन्हैया के किरदार में स्वीकार कर लिया तो फिर मेरी फिल्म में अजय देवगन के चित्रगुप्त के किरदार में सूट बूट पहनने पर इतना हंगामा क्यों?’

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