Tabu
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एक आखिरी सवाल, फिल्म दे दे प्यार दे में आपके किरदार मंजू को लेकर। अपने पति को किसी दूसरी प्रेमिका के साथ जाने देने की हिम्मत दिखाने वाले इस किरदार के जरिए आप क्या कहना चाहती रहीं?
मंजू के इस किरदार की तमाम खासियतें हैं। ऐसा पहले भी हुआ होगा किसी फिल्म में, लेकिन आज के दौर की किसी फिल्म में मैंने किसी पूर्व पत्नी की ऐसी सोच नहीं देखी। मैं खुद भी इसमें यकीन करती हूं और ये बात मेरे जरिए दर्शकों तक पहुंच रही हैं, ये सोचना ही मेरे लिए दिलचस्प था। मुझे लव रंजन की यही बात अच्छी लगी। चीजों को पकड़ कर रखने से आप उनके गुलाम बन जाते हैं। खुद को आजाद रखना और अपने किसी बंधन से दूसरों को आजाद करना, यही मंजू की ताकत है। फिल्म में मंजू का एक संवाद है बच्चों के लिए, ‘जब आप अपने मां बाप की संपत्ति के वारिस होते हैं तो उनके टूटे रिश्तों की विरासत संभालना भी उनका ही दायित्व होता है।’ यही बात मंजू के किरदार की सबसे अहम बात है।