अपनों घरों को रवाना होते प्रवासी
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इस एनिमेटेड वीडियो के साथ तापसी पन्नू बैकग्राउंड में एक कविता भी बोलती सुनाई दे रही हैं। कविता कुछ इस तरह है कि 'प्रवासी' के साथ। इसके बाद तापसी की कविता सुनाई देती है जिसमें एक्ट्रेस कहती हैं, ‘हम तो बस प्रवासी हैं, क्या इस देश के वासी हैं? अगर हम नहीं हैं इंसान तो मार दो हमें भेजो फरमान। खाने को तो कुछ ना मिल पाया.. भूख लगी तो डंडा खाया। फासले तय किए हजारों मील के कुछ साइकिल पर कुछ पैर नंगे। मरे कई भूख से और कई धूप से...पर हिम्मत न टूटी बड़ों के झूठ से। बस से भेजकर ट्रेन से भेजकर जान खो बैठे रास्ते भूलकर। यहां प्रतिमाओं की बड़ी है हस्ती, पर इंसानों की जान है सस्ती। बड़े सपने, अच्छे दिन बतियाए पर भूख किसी की मिटा न पाए। चाहिए न भीख ना दान। बस मत छीनिए आत्म सम्मान। हम तो बस प्रवासी हैं क्या इस देश के वासी हैं?’।