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इस हीरोइन ने 42 साल की उम्र में किया डेब्यू और फिर लगा दी सबसे बड़ी 10 हिट फिल्मों की लाइन

Sat, 20 Jun 2020 12:00 PM IST
shrilata biswas रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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सुषमा सेठ की फिल्में - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री सुषमा सेठ को फिल्मों में ज्यादातर मां और दादी का किरदार निभाने के लिए जाना जाता है। वह पर्दे पर ऋषि कपूर, अक्षय कुमार, शाहरुख खान, ऋतिक रोशन, अनिल कपूर और प्रीति जिंटा जैसे कई बेहतरीन हिंदी फिल्मों के कलाकारों की दादी और मां का किरदार निभा चुकी हैं। उनका जन्म तो 1936 में दिल्ली में हुआ था लेकिन हिंदी सिनेमा में अपनी पहली फिल्म मिलने तक वह 42 साल की हो चुकी थीं। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म 'जुनून' सुषमा सेठ की पहली फिल्म रही लेकिन इसके बाद उनके करियर में अब तक ब्रेक नहीं लगा। आइए जानते हैं उनके करियर के कुछ शानदार किरदारों के बारे में।
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जुनून - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जुनून (1978)
सुषमा सेठ ने इस फिल्म के साथ ही अपने हिंदी सिनेमा में करियर की शुरुआत की है। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी यह फिल्म रस्किन बॉन्ड के उपन्यास 'ए फ्लाइट ऑफ पीजन्स' पर आधारित है। फिल्म में शशि कपूर, जेनिफर केंडल, नफीसा अली, टॉम ऑल्टर, शबाना आजमी, कुलभूषण खरबंदा, नसीरुद्दीन शाह, दीप्ति नवल, पर्ल पद्मश्री और खुद सुषमा सेठ ने मुख्य भूमिकाएं निभाई है। सुषमा सेठ ने फिल्म में शशि कपूर के किरदार जावेद खान की चाची का किरदार निभाया है। यहीं से सुषमा का फिल्मों में दादी और मां बनने का सिलसिला शुरू हो गया था।
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सिलसिला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सिलसिला (1981)
यश चोपड़ा के निर्देशन और निर्माण में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। हालांकि, फिल्म में शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, रेखा और संजीव कुमार जैसे भारी भरकम कलाकारों की टोली थी। फिर भी यह फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकामयाब रही है। यह इकलौती फिल्म है जिसमें सुषमा सेठ ने किसी के रिश्तेदार का किरदार नहीं निभाया है। वह एक अभिनेत्री के किरदार में नजर आईं। इस फिल्म के अलावा सुषमा ने अमिताभ बच्चन के साथ 'कभी खुशी कभी गम' में भी काम किया है जिसमें वह अमिताभ की सास के किरदार में नजर आईं।

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प्रेम रोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
प्रेम रोग (1982)
राज कपूर के निर्देशन और निर्माण में बनी यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्मों में से एक है। यह फिल्म देवधर और मनोरमा के बचपन से लेकर जवानी तक के प्यार की दास्तां सुनाती है। फिल्म में सुषमा सेठ ने मनोरमा की आंटी का किरदार निभाया है। वह ठाकुर खानदान की बहू हैं लेकिन उन्होंने जिस लड़की को अपनी बेटी की तरह पाला वह एक गरीब अनाथ लड़के, जो शुरुआत से ही उनके टुकड़ों पर पलता रहा, देवधर से प्यार करने लगती है। यह पहला मौका था जब सुषमा ने ऋषि कपूर के साथ इस फिल्म में काम किया। इस फिल्म के बाद तो ये दोनों नगीना, दीवाना, बोल राधा बोल, चांदनी जैसी कई और फिल्मों में भी मां और बेटे के किरदार में नजर आए।
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तवायफ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तवायफ (1985)
सुषमा सेठ एक काबिल अदाकारा रही हैं लेकिन फिल्मों में उनके किरदार इतने बड़े नहीं रहे या फिर यूं कहें कि इतने खास नहीं रहे कि उन्हें अपने अभिनय के लिए किसी तमगे से नवाजा गया हो। हालांकि, इस फिल्म में सुषमा सेठ को अपनी अदाकारी थोड़े बड़े पैमाने पर दिखाने का मौका मिला। यहां वह एक कोठे की मालकिन अमीना बाई के किरदार में नजर आईं। बीआर चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।
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राम तेरी गंगा मैली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राम तेरी गंगा मैली (1985)
राज कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में भी सुषमा सेठ को अपना हुनर दिखाने का अच्छा खासा मौका मिला। फिल्म में वह मुख्य अभिनेता राजीव कपूर के किरदार नरेंद्र सहाय की दादी मां के किरदार में नजर आईं। नरेंद्र अपनी दादी मां के इतने नजदीक होता है कि वह अपनी सारी बातें सिर्फ अपनी दादी मां को ही बताता है। कमाल की बात तो यह है दादी मां उसकी बातों को अच्छे से समझती भी हैं। अपनी दादी मां के गुजर जाने के बाद नरेंद्र इतना अकेला हो जाता है कि अपने माता-पिता के होते हुए भी खुद को अनाथ महसूस करने लगता है। भले ही किरदार एक बूढ़ी और अपाहिज दादी का हो लेकिन फिल्म देखते हुए निगाहें उनके किरदार पर ही टिकी रहती हैं।
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नगीना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नगीना (1986)
हरमेश मल्होत्रा के निर्देशन और निर्माण में बनी इस फिल्म में सुषमा सेठ एक बार फिर ऋषि कपूर की मां के किरदार में नजर आईं। वह अपने बेटे राजीव की शादी एक खूबसूरत लड़की विजया सिंह से करवाना चाहती हैं जबकि राजीव को पहली नजर में रजनी से प्यार हो जाता है। राजीव की मां इसके सख्त खिलाफ हैं लेकिन फिर भी अपने बेटे की जिद के सामने अंत में उन्हें झुकना ही पड़ता है। उस वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शुमार इस फिल्म में श्रीदेवी, ऋषि कपूर, कोमल महुवाकर, सुषमा सेठ, अमरीश पुरी और प्रेम चोपड़ा मुख्य भूमिकाओं में हैं।

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चांदनी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चांदनी (1989)
80 के दशक में कई फिल्में फ्लॉप होने के बाद यश चोपड़ा के करियर को इस फिल्म ने ही फिर से संभाला था। यश के निर्देशन और निर्माण में बनी इस रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा फिल्म में एक बार फिर सुषमा सेठ ऋषि कपूर की मां के किरदार में नजर आईं। यह एक लव ट्रायंगल फिल्म है जिसमें वह अपने बेटे को फंसने से रोकने की बहुत कोशिश करती हैं। हालांकि फिल्म बुनी इस बुनियाद पर गई थी इसलिए वह अपने बेटे को रोक नहीं पातीं। ऋषि कपूर और सुषमा सेठ के अलावा इस फिल्म में श्रीदेवी, विनोद खन्ना और वहीदा रहमान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।

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दीवाना - फोटो : फाइल
दीवाना (1992)
राज कंवर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सुषमा सेठ ने ऋषि कपूर के किरदार रवि की मां की ही भूमिका निभाई है। फिल्म में रवि को उसके अपने ही रिश्तेदार साजिश के तहत मरवा देते हैं और उसकी पत्नी दिव्या भारती का किरदार काजल विधवा हो जाती है। यहां से रवि की मां काजल को बेटी की तरह पालती हैं और फिर से नई जिंदगी शुरू करने के लिए प्रेरित करती हैं। यहां तक कि वह एक नए लड़के से शादी करने की अनुमति भी दे देती हैं। फिल्म में ऋषि कपूर, दिव्या भारती, शाहरुख खान, अमरीश पुरी, मोहनीश बहल, सुषमा सेठ आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं।

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कभी खुशी कभी गम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कभी खुशी कभी गम (2001)
यह हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में से एक रही है और इसमें आज के समय के सबसे ज्यादा चर्चित कलाकार अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, शाहरुख खान, काजोल, ऋतिक रोशन, करीना कपूर आदि मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं। अब इतने बड़े कलाकारों के बीच में भी सुषमा सेठ ने जया बच्चन के किरदार नंदिनी रायचंद की मां का किरदार निभाने के लिए जगह पाई। पर्दे पर उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला लेकिन जितना मिला, उतने में उन्होंने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया है।
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कल हो ना हो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कल हो न हो (2003)
यश जौहर और करण जौहर के निर्माण में बनी इस फिल्म में सुषमा सेठ ने प्रीति जिंटा की दादी लज्जो कपूर का किरदार निभाया है। इस कपूर खानदान में जितने भी फैसले लिए जाते हैं सब में नैना कैथरीन की दादी की भी सहमति होती है। हालांकि कुछ फैसलों को लेकर इस परिवार में विवाद पैदा होता है और बाद में जब लज्जो को अपनी गलती दिखाई देती है तो पछतावे के रूप में वह सुधार भी खुद ही करती हैं। निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी यह एक पारिवारिक रोमांटिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जिसमें जया बच्चन, शाहरुख खान, सैफ अली खान, प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में और सुषमा सेठ, रीमा लागू, लिलेट दुबे, डेलनाज पॉल जैसे कलाकार सहायक भूमिकाओं में नजर आए।

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