सुशांत सिंह राजपूत
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रिस्क लेने वाले कलाकार थे सुशांत
जब दूसरे ही टीवी सीरियल को अपार सफलता मिली, तो 2011 में पवित्र रिश्ता में मेन रोल को छोड़ उन्होंने एक बार सब को चौंका दिया था।करीब दो साल तक उनका कोई खास अता-पता नहीं था। नए नए सितारों से भरे टीवी और फ़िल्मों की दुनिया में दो साल की गैर मौजूदगी काफी लंबा वक्त होता है। फिर 2013 में आई उनकी पहली हिंदी फिल्म काई पो चे। गुजरात दंगों के बैकग्राउंड में बनी इस फिल्म में ईशांत के किरदार को सुशांत ने बेहतरीन तरीक से निभाया था। और किसी नए कलाकार के लिए ये आसान किरदार नहीं था। रिस्क लेने के अलावा सुशांत की दूसरी खूबी थी विविधता से एक्सपेरिमेंट करना। इसमें वो कभी सफल भी हुए और कई बार असफल भी हुए। महज छह साल के फ़िल्मी करियर में सुशांत पर्दे पर कभी महेंद्र सिंह धोनी हो गए तो कभी ब्योमकेश बख्शी तो कभी शादी के रिश्ते पर सवाल उठाने वाले शुद्ध देसी रोमांस के रघु राम भी।
सुशांत को सबसे ज्या सफलता और वाहवाही शायद मिली फिल्म धोनी: एन अनटोल्ड स्टोरी के लिए। खुद धोनी ने इस बात की तारीफ की थी कैसे सुशांत ने धोनी का बैटिंग स्टांस, चाल-ढाल को अपना लिया था। खासकर जिस तरह से उन्होंने धोनी के हेलिकॉप्टर शॉट फिल्म में लगाए। फिल्मों से परे असल जिंदगी में भी वो मुद्दों पर स्टांस लेने वाले युवा कलाकार थे जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। जब संजय लीला भंसाली का करणी सेना लगातार विरोध कर रही थी और हमला कर रही थी, तो सुशांत सिंह राजपूत ने विरोध स्वरूप अपना सरनेम ट्विटर से हटा दिया था और सिर्फ़ सुशांत नाम रख लिया था। ट्रोल्स का जवाब देते हुए उन्होने लिखा था, 'मूर्ख मैंने अपना सरनेम बदला नहीं है। तुम यदि बहादुरी दिखाओगे तो मैं तुमसे 10 गुना ज्यादा राजपूत हूं। मैं कायरतापूर्ण हरकत के खिलाफ हूं।'