सुशांत सिंह राजपूत
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बाबिल आगे लिखते हैं कि 'स्वाभाविक रूप से हम आरोप प्रत्यारोप करने से पीछे नहीं हटे हैं। जो कि अपने आप में निरर्थक है क्योंकि इससे शांति नहीं मिलेगी। ये एक प्रकार का झूठ ही है। आप सभी से निवेदन है कि इस दुखद घटना के लिए किसी को जिम्मेदार मत ठहराइए। हमें स्वीकार करना होगा कि जिंदगी उतार चढ़ावों से भरी हुई है और हमें इसे ऐसे ही स्वीकार करना होता है।'