सुशांत सिंह राजपूत
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फैसले में आगे कहा गया कि, 'यह माना जाना चाहिए कि पटना पुलिस ने शिकायत दर्ज करने में कोई अवैधता नहीं की है। शिकायत में आरोपों की प्रकृति को देखते हुए (जो कि गबन और विश्वास के उल्लंघन से संबंधित है), बिहार पुलिस द्वारा क्षेत्राधिकार की कवायद क्रम में दिखाई देती है। जांच के चरण में, उन्हें एफआईआर को मुंबई पुलिस को स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं थी। उसी कारण से, बिहार सरकार सीबीआई को जांच सौंपने के लिए सहमति देने के लिए सक्षम थी, और सीबीआई द्वारा इस तरह की चल रही जांच को वैध माना जाता है।'