हिंदी सिनेमा में जब-जब अदब, सलीके और शऊर की बात होगी तो पहली पंक्ति में खड़े जिन अदाकारों को याद किया जाएगा, उसमें सुनील दत्त का नाम न आए, यह मुमकिन नहीं। उनकी शख्सियत का सादापन ही था, जिसने बस में टिकट काटने वाले बलराज दत्त को इस मुकाम पर लाकर खड़ा किया कि लोग सुनील दत्त की फिल्म का टिकट खरीदने के लिए हॉल के बाहर मारामारी करते दिखाई देते थे। कौन भूल सकता है फिल्म 'मदर इंडिया' के बिरजू, 'मिलन' के गोपी और 'जानी दुश्मन' के लाखन को। एक राजनेता के रूप में भी वह सफल हुए। हालांकि, जिंदगी ने उन्हें कई उतार-चढ़ाव दिखाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज सुनील दत्त की पुण्यतिथि है। जानते हैं एक शख्स के शख्सियत बनने की कहानी को...