फिल्म यादें
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इस फिल्म में सुनील दत्त का किरदार घर आता है और देखता है कि उसकी पत्नी और बच्चे घर पर नहीं। उसको लगता है वो उसको छोड़ कर चले गए। आगे जब वो अकेला होता है, खुद से बातें करता है, वक्त में पीछे जाता है, आसपास की चीजों से बात करता है और कहानी आगे बढ़ती है। फिल्म में नरगिस की आवाज सुनाई देती है।
क्यूरेटर, फिल्म इतिहासकार और लेखक अमृत गंगर कहते हैं, "इस फिल्म में जो भी दिखाया गया वो अकेलेपन का अहसास दिखाने की कोशिश है। क्या होता है उस किरदार के साथ जब वो घर आता है और उससे लगता है कि पत्नी और बच्चे उसको छोड़ कर चले गए। वो अपने आसपास पड़े सामान से बातें करता है और वो कहीं ना कहीं अहसास में जीवित हो उठते हैं।"