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फिल्मों में आने से पहले रेडियो में नौकरी करते थे सुनील दत्त, सफल अभिनेता होने के बावजूद जिंदगी भर करना पड़ा संघर्ष

Sat, 06 Jun 2020 09:14 AM IST
shrilata biswas बीबीसी हिंदी
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सुनील दत्त - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सुनील दत्त को जितनी कामयाबी फिल्मों में मिली, उतने ही कामयाब वो राजनीति में भी रहे। हालांकि बॉलीवुड में उन्होंने ऐसा भी दौर देखा जब उन्हें फिल्में नहीं मिल रही थीं। सुनील दत्त आज ही के दिन यानी 6 जून 1929 को झेलम में पैदा हुए थे, जो अब पाकिस्तान में है। सुनील दत्त ने अपने छह दशक के लंबे फिल्मी करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था।
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सुनील दत्त और नरगिस - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2005 में सुनील दत्त ने दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन सुजाता, मदर इंडिया, रेशमा और शेरा, मिलन, नागिन, जानी दुश्मन, पड़ोसन, जैसी फिल्मों के लिए वो हमेशा याद किए जाते रहेंगे। अभिनय के साथ ही उन्होंने फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाए। सुनील दत्त ने 1964 में एक प्रयोगधर्मी फिल्म 'यादें' बनाई थी। इस फिल्म का नाम सबसे कम कलाकार वाली फिल्म के रूप में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। इस फिल्म के आखिरी सीन में नरगिस एक छोटे से किरदार में नजर आई हैं। बाकी फिल्म में सुनील के अलावा कोई और एक्टर नहीं है। इस फिल्म की कहानी लिखी थी सुनील दत्त की पत्नी नरगिस दत्त ने। फिल्म में एक ऐसे पति की कहानी है जिसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई है और वो उससे जुड़ी बातों को याद करता है।

 
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सुनील दत्त और संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
संघर्ष
वैसे उनका निजी जीवन काफी संघर्ष भरा रहा था। सुनील दत्त से जुड़ी निजी यादों को साझा करते हुए वरिष्ठ फिल्म पत्रकार जयप्रकाश चौकसे कहते हैं, "सुनील दत्त ने पूरे जीवन असंभव लड़ाइयां लड़ी हैं। अपने बेटे को ड्रग्स की लत छुड़ाने और पत्नी का इलाज कराने के लिए वो दो बार अमरीका गए। इस दौरान वो बहुत परेशान रहे। चौकसे कहते हैं, "उनकी मुसीबतें कभी कम न हुईं। कैंसर और ड्रग्स ने उन्हें बहुत लाचार और दुखी कर दिया था। ड्रग्स और कैंसर के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए उन्होंने दो बार मुंबई से चंडीगढ़ तक पदयात्रा की।"

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बच्चों के साथ सुनील दत्त और नरगिस - फोटो : सोशल मीडिया
चौकसे बताते हैं कि 'सुनील दत्त पर्दे पर खलनायक की भूमिका नहीं निभाना चाहते थे। जब 1971 से 1975 तक कोई फिल्म नहीं मिलने से उनका करियर लड़खड़ाने लगा तब अभिनेत्री साधना और आरके नय्यर ने उन्हें 'गीता मेरा नाम' फिल्म में काम करने को कहा। लाख समझाने के बाद उन्होंने पहली बार खलनायक की भूमिका निभाई। उसके बाद से उन्हें फिर से फिल्में मिलनी शुरू हो गईं।"
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अमिताभ बच्चन, सुनील दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
पंढरी जुकर 1958 से 2005 तक सुनील दत्त के मेकअप मैन और फोटोग्राफर रहे थे। सुनील दत्त को याद करते हुए पंढरी दादा ने बताया था कि 'दत्त साहब दूसरों की बहुत मदद किया करते थे। मेरी पत्नी को हिंदुजा अस्पताल में भर्ती ना करने पर खुद सुनील दत्त साहब मेरी पत्नी को अस्पताल लेकर गए थे उन्होंने सभी डॉक्टरों को मेरी पत्नी का बेहतर इलाज करने की गुजारिश की थी और तो और उन्होंने अस्पताल का पूरा खर्चा उठाया हालांकि मेरी बीवी बच नहीं सकी, इसका उन्हें बहुत दुख हुआ था।"

''अगर कोई काम ना हो रहा हो तो सुनील दत्त को बहुत गुस्सा भी आया करता था लेकिन उन्हें मजाक करने की भी खूब आदत थी।''
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सुनील दत्त और नरगिस - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसा ही एक किस्सा साझा करते हुए पंढरी दादा ने बताया था, "फिल्म हमराज के लिए मैं उनका 110 साल के बूढ़े के किरदार के लिए मेकअप कर रहा था। तभी उनसे मिलने नरगिस जी आ गईं। उन्होंने दत्त साहब से ही पूछ लिया कि बाबा दत्त साहब कहां हैं। ये सुनते ही दत्त साहब ने मुझे कुछ ना बताने का इशारा किया और पूरे दो घंटे के इंतजार के बाद जब नरगिस चलने लगीं तो मुझे बुरा लगा। मैंने नरगिस जी को कहा दत्त साहब आपके बगल में ही हैं। यह सुनते ही नरगिस हैरान हो गईं और दत्त साहब जोर से हंस पड़े। नरगिस जी मेरे पास आईं और कहने लगीं आपने मेरे पति का ऐसा मेकअप किया कि उनकी पत्नी होते हुए भी मैं उन्हें नहीं पहचान पाई। तब उन्होंने मुझे अपनी कीमती घड़ी यादगार के तौर पर दी।"
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सुनील दत्त और नरगिस - फोटो : सोशल मीडिया
कैसे मिला ब्रेक
मशहूर रेडियो प्रसारक अमीन सयानी सुनील दत्त के पुराने मित्र थे। हीरो बनने से पहले सुनील दत्त भी रेडियो सीलोन में प्रसारक थे। सयानी और दत्त उसी वक्त से अच्छे मित्र थे।
सयानी ने बताया था कि, "रेडियो कार्यक्रमों के दौरान दत्त की मुलाकात बड़ी-बड़ी फिल्मी हस्तियों से होती रहती थी। कई लोग उन्हें देखकर कहा करते थे इतने सुन्दर, लंबे, तगड़े नौजवान, इतने खूबसूरत इंसान हो तुम फिल्म कलाकार क्यों नहीं हो?"
ऐसी ही एक मुलाकात के बाद फिल्म निर्माता रमेश सहगल ने अपनी फिल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म' के लिए सुनील दत्त को हीरो के रोल का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
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सुनील दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
अमीन सयानी ने आगे बताया कि, "अपने दोस्त को याद करते हुए इतना कहूंगा की पैंसठ साल से मेरा नाता रहा है हिंदुस्तानी फिल्मी दुनिया से, मुझे हर तरह के लोग मिले हैं संगीत सितारे, फिल्मी सितारे, निर्माता, निर्देशक और पॉलिटिशियन। इन सबमें सबसे खूबसूरत इंसान अगर आप चुनने को कहें तो मैं दत्त साहब का ही नाम लूंगा। मुझे आज भी याद है जब उनकी मौत हुई थी तो कैसे हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। वो बहुत अच्छे अभिनेता, पॉलिटिशियन और इंसान थे।"

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