बीता हफ्ता सिनेमा के लिहाज से काफी हलचल भरा रहा। वो दिलीप कुमार की फिल्म का ‘गोपी’ का गाना तो आपको याद ही होगा, ‘सुख के सब साथी, दुख में न कोय...!’ जीवन भी ऐसा ही है। लोग दोस्त बनकर आते हैं, और दुख देकर चले जाते हैं। यही जीवन के सबक भी हैं। अगर आपने डार्कनाइट सीरीज की फिल्में देखी हैं तो इसकी पहली फिल्म ‘बैटमैन बिगिन्स’ में एक संवाद है जिसके मुताबिक दुख तब तक बना रहता है, जब तक कि उसके कारण का अस्तित्व है। किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान से मोह त्यागने का पहला चरण है, उसका अस्तित्व ही जीवन में नकार देना। लेकिन, हरीलाल गांधी ऐसा नहीं कर सके। जीवन भर दुखी रहे। ‘गांधी माई फादर’ के बाइस्कोप से शुरू हुआ बीता हफ्ता ‘हर दिल जो प्यार करेगा’, ‘मुगल ए आजम’, ‘खलनायक’ और ‘मैं सोलह बरस की’ से होता हुआ ‘कर्मा’ तक पहुंचा। आज इतवार है तो आपके लिए पेश है ये संडे बाइस्कोप गुलदस्ता, इन सारी फिल्मों के साथ, एक साथ।