उत्तम कुमार के साथ खूब जमी जोड़ी
साल 1952 में सुचित्रा की बांग्ला फिल्म सारे चतुर रिलीज हुई, कहा जाता है कि यह उनकी पहली फिल्म थी। एक वक्त ऐसा था जब उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की जोड़ी को बांग्ला सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध जोड़ी माना जाने लगा। दोनों ने साथ में एक से बढ़कर एक कईं हिट फिल्में कीं। साल 1953 से 1978 के बीच सुचित्रा ने हिंदी और बांग्ला कुल मिलाकर 61 फिल्में की थीं। जिनमें से 30 उत्तम कुमार के साथ थी। सुचित्रा सेन ने 1978 में फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास ले लिया था और पब्लिक के बीच न आना बेहतर समझा। सुचित्रा सेन फेमस अभिनेत्री मुनमुन सेन की मां और रिया और राइमा सेन की नानी हैं।
इस फिल्म में किया इंदिरा गांधी का रोल
सुचित्रा सेन ने कई बॉलीवुड फिल्मों में दमदार किरदार किए। दिलीप कुमार की 'देवदास' (1955) में वे पारो की भूमिका में नजर आईं। सुचित्रा की जिस फिल्म की खूब चर्चा हुई और जो विवादों में भी रही, वह थी 'आंधी'। यह फिल्म उस साल रिलीज हुई, जिस साल आपातकाल लगा यानी साल 1975। आपातकाल जून में लगा और उससे कुछ महीने पहले फरवरी में फिल्म 'आंधी' रिलीज हुई। इसमें सुचित्रा का किरदार आरती सिंह दरअसल, इंदिरा गांधी से प्रेरित बताया गया। अभिनेत्री का लुक भी पूर्व पीएम जैसा ही देखने को मिला। 'आंधी' को पहली एजेंडा फिल्म माना गया। दावे किए गए कि यह फिल्म इंदिरा गांधी की छवि खराब करने के लिए बनाई गई। इस फिल्म पर काफी विवाद हुआ और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी। बाद में इमरजेंसी लगने के बाद तो फिल्म पर बैन ही लगा दिया गया। इस फिल्म में सुचित्रा के अपोजिट संजीव कुमार नजर आए।
राज कपूर और सत्यजीत रे के ऑफर ठुकराए
सुचित्रा सेन के बारे में कहा जाता है कि वे उसूलों की बहुत पक्की थीं। फिल्मों का चयन करने के मामले में वे बिल्कुल ढिलाई नहीं बरतती थीं। कोई भी फिल्म काफी सोच विचार करने के बाद चुनतीं, जिस वजह से उन्हें कई बड़े फिल्मकारों के प्रस्ताव ठुकराने पड़े। उन्होंने राज कपूर की फिल्म को भी एक पल में ठुकरा दिया था। कहा जाता है कि सुचित्रा सेन ने राज कपूर की फिल्म सिर्फ इसलिए ठुकरा दी, क्योंकि राज कपूर का झुक कर फूल देने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया था। दिग्गज फिल्मकार सत्यजीत रे की फिल्म का ऑफर भी सुचित्रा ने ठुकरा दिया था। कहा जाता है कि सुचित्रा को लेकर वे फिल्म देवी चौधुरानी बनाना चाहते थे, लेकिन इसे भी सुचित्रा ने मना कर दिया।
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इस वजह से ठुकरा दिया दादा साहब फाल्के पुरस्कार
सुचित्रा के बारे में कहा जाता है कि वो बहुत ही स्वाभिमानी थीं, निजी जिंदगी में उसूलों वाली एक्ट्रेस थीं। कहा जाता है कि एक बार उन्होंने मन में जो ठान लिया उसे किसी भी हाल में करके रहती थीं। ऐसे कम ही लोग हैं जिन्हें पता है कि सुचित्रा ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार को ठुकरा दिया था। कहा जाता है कि सिर्फ इसलिए उन्होंने यह सम्मान लेने से मना किया क्योंकि इसके लिए उन्हें कोलकाता से दिल्ली जाना पड़ता और दूसरा उन्होंने पब्लिक के बीच न जाने का भी वादा किया हुआ था। साल 2014 में सुचित्रा ने 82 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था।
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