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Subhash Ghai: इन 10 बेहतरीन फिल्मों ने दिलाया शोमैन का तमगा, बनने आए थे सुपरस्टार

Sun, 24 Jan 2021 12:12 PM IST
shrilata biswas अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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सुभाष घई की फिल्में - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी फिल्मों के महान फिल्मकार और अभिनेता राज कपूर के बाद अगर शोमैन किसी और को कहा जाता है तो वह हैं फिल्मकार सुभाष घई। इसका कारण तो बिल्कुल साफ है। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में गिनी चुनी फिल्मों का ही निर्देशन किया है और उनकी शुरुआती लगभग सभी फिल्में सुपरहिट साबित हुईं। यह भी बात ज्ञात है कि सुभाष फिल्मों में हीरो बनने आए थे लेकिन जब उनका सिक्का वहां नहीं चला तो उन्होंने कैमरे के सामने आने का हठ त्याग कर कैमरे के पीछे रहकर ही अपने काम को अंजाम देना सही समझा। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बताते हैं कि कौन सी फिल्मों ने सुभाष को शोमैन का दर्जा दिलाया।
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कालीचरण - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कालीचरण (1976) 
फिल्मों में सुभाष घई ने अपने करियर की शुरुआत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ की थी। सुभाष और राजेश समेत लगभग पांच हजार लोगों ने एक प्रतियोगिता में भाग लिया जिसमें से तीन लोग चुने गए। उन तीन लोगों में दो तो सुभाष और राजेश थे। और तीसरे कलाकार रहे धीरज कुमार। इस प्रतियोगिता के कुछ समय बाद ही राजेश खन्ना को काम मिलना शुरू हो गया लेकिन सुभाष को काफी समय लगा। उन्होंने पहले तो 'तकदीर', 'आराधना' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। जब अभिनय में काम न बना तो सुभाष की रुचि फिल्म निर्देशन में हुई। उन्हें निर्देशन के लिए पहली फिल्म वर्ष 1976 की 'कालीचरण' मिली जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय, प्रेमनाथ, अजीत, मदन पुरी, डैनी डेंजोंगपा जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में रहे। इस फिल्म में निर्देशन का काम सुभाष को शत्रुघ्न सिन्हा की सिफारिश पर मिला था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई।
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कर्ज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कर्ज (1980) 
पहली फिल्म हिट होने के बाद सुभाष की शुरुआत अच्छी हो गई तो उन्होंने 'विश्वनाथ' और 'गौतम गोविंदा' जैसी फिल्में भी निर्देशित कीं। लेकिन, उन्हें दूसरी बड़ी कामयाबी वर्ष 1980 में आई फिल्म 'कर्ज' से मिली। इस थ्रिलर ड्रामा फिल्म में ऋषि कपूर, टीना मुनीम, सिमी ग्रेवाल, राज किरण, प्राण जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में रहे। फिल्म पुनर्जन्म की कहानी पर आधारित रही जो लोगों को बहुत पसंद आई। इस फिल्म के संगीत की बहुत तारीफ हुई। सुभाष घई की यह फिल्म दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर के करियर की यादगार फिल्मों में शुमार है।

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विधाता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विधाता (1982) 
वर्ष 1982 में रिलीज हुई फिल्म 'विधाता' सुभाष घई के करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म ने सुभाष को शीर्ष फिल्मकारों की सूची में स्थान दिलाया। इस फिल्म में दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, संजीव कुमार, संजय दत्त, पद्मिनी कोल्हापुरी, अमरीश पुरी, सुरेश ओबेरॉय, सारिका जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। यह फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसी फिल्म का असर हुआ कि सुभाष ने फिल्म 'मेरी जंग' को छोड़कर आगे की बाकी सभी फिल्में अपनी कंपनी मुक्ता आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाईं। यहीं से सुभाष अभिनेताओं का करियर बदलने लगे।
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हीरो - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हीरो (1983) 
देव आनंद और मिथुन चक्रवर्ती की साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म 'स्वामी दादा' में जैकी श्रॉफ का काम देखकर सुभाष बहुत प्रभावित हुए। इसलिए, उन्होंने अपनी फिल्म 'विधाता' में एक छोटा सा किरदार जैकी को भी देना चाहा। लेकिन, जैकी श्रॉफ ने मना किया। जैकी ने सुभाष से गुजारिश की थी कि अब उन्हें सहायक अभिनेता का किरदार न दें। कुछ ऐसा करें जिससे कि उनका करियर आगे बढ़े। तब सुभाष ने जैकी से वादा किया और उन्होंने फिल्म 'हीरो' में जैकी को मुख्य अभिनेता के तौर पर लांच किया। यहीं से जैकी श्रॉफ मशहूर हो गए।
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मेरी जंग - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मेरी जंग (1985) 
जब सुभाष घई अपनी मल्टीस्टारर फिल्म 'विधाता' की शूटिंग कर रहे थे, उस वक्त अभिनेता अनिल कपूर की एक आदत थी कि वह अक्सर इस फिल्म के सेट पर सुभाष से मिलने चले आया करते थे। वह हमेशा सुभाष से सिर्फ एक ही बात कहते थे कि अगर किसी फिल्म की कास्टिंग हो तो उस समय उन्हें भी ध्यान में रखें। इसलिए अनिल सुभाष के ध्यान में बस गए थे। सुपरहिट फिल्म 'हीरो' के बाद जब सुभाष ने 1985 में अनिल कपूर को लेकर फिल्म 'मेरी जंग' बनाई तो लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ। उनसे पूछा गया कि उन्होंने फिल्म में जैकी श्रॉफ को क्यों नहीं लिया? तो, इसका कारण सुभाष ने बताया कि यह किरदार अनिल के लायक ही था।
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कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कर्मा (1986) 
'हीरो' और 'मेरी जंग' से सुभाष ने जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर का फिल्मी करियर ही बदल कर रख दिया था। इसके बाद इन दोनों को सुभाष ने महान कलाकार दिलीप कुमार के साथ वर्ष 1986 की फिल्म 'कर्मा' में लिया। शूटिंग के दौरान जैकी श्रॉफ तो दिलीप कुमार के सामने अपने संवाद बोलने से कतराते थे। बहुत रीटेक हुए और ऐसा कई बार हुआ तो दिलीप कुमार से रहा न गया। उन्होंने सुभाष घई से कहा कि वह जैकी को समझाएं और उन्हें अच्छे से तैयार करें। उसके बाद उन्हें शूटिंग के लिए बुलाएं। वैसे जैकी बहुत अच्छे कलाकार रहे लेकिन वह दिलीप का प्रभाव था जिसके कारण वह थोड़े हिचकिचा रहे थे। हालांकि, सुभाष ने फिल्म शानदार बनाई और लोगों ने इस फिल्म को खूब प्यार भी दिया। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

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सौदागर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सौदागर (1991) 
जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर की काबिलियत को समझने के लिए सुभाष ने एक और फिल्म 'राम लखन' लिख डाली और उसका खुद निर्माण और निर्देशन भी किया। यह फिल्म भी सुपरहिट साबित हो गई। लेकिन, सुभाष की इच्छा फिर से दिलीप कुमार के साथ काम करने की हुई। उन्होंने दिलीप के लिए एक और फिल्म सौदागर लिखी जो 1991 में रिलीज हुई। इस फिल्म में सुभाष ने दिलीप के साथ एक और महान कलाकार राजकुमार को लिया। दिलीप और राजकुमार दो अलग शैली के कलाकार रहे। इन दोनों को साथ लाना बहुत मुश्किल काम था। लेकिन, सुभाष ने यह कर दिखाया। इस फिल्म के लिए सुभाष ने अपना इकलौता सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का फिल्मफेयर पुरस्कार पाया।

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खलनायक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
खलनायक (1993) 
फिल्म 'विधाता' के वक्त सुभाष अभिनेता संजय दत्त से बहुत नाराज थे। दरअसल, संजय उस समय ड्रग्स के आदी थे और वह सेट पर नशे में ही रहा करते थे। इस चक्कर में सुभाष उनसे नाराज हो गए। उन्होंने संजय को अपनी अगली किसी भी फिल्म में न लेने की की ठान रखी थी। संजय के पिता सुनील दत्त ने सुभाष से गुजारिश भी की थी लेकिन सुभाष में उनका कहना नहीं माना। जब संजय ने अपनी ड्रग्स की लत को छोड़ा और थोड़े ठीक ठाक हुए, तब जाकर सुभाष ने संजय को मुख्य अभिनेता लेकर फिल्म बनाई 'खलनायक'। 1993 में रिलीज हुई यह फिल्म संजय दत्त को एक नई पहचान दिलाने में कामयाब रही।

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परदेस - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
परदेस (1997) 
सुभाष घई की मुलाकात माधुरी दीक्षित से पहली बार फिल्म 'कर्मा' के सेट पर हुई थी। माधुरी अपनी एक फिल्म के लिए आइटम नंबर की शूटिंग कर रही थीं। तब वह इतनी लोकप्रिय भी नहीं थीं। सुभाष को माधुरी पसंद आईं इसलिए उन्होंने अपनी अगली फिल्म 'राम लखन' में उन्हें लेने का सोचा। हालांकि, माधुरी उस समय काम बहुत कर रही थीं इसलिए 'राम लखन' से पहले उनकी फिल्म 'तेजाब' रिलीज हुई और माधुरी मशहूर हो गईं। हालांकि, फिर भी 'राम लखन' में माधुरी को अहम भूमिका मिली। फिल्म 'परदेस' में गंगा का किरदार सुभाष ने माधुरी को ध्यान में रखकर ही लिखा था। लेकिन, जब सुभाष और माधुरी फिल्म 'खलनायक' में एक साथ काम कर रहे थे तब इन दोनों के बीच कुछ विवाद हुआ और वर्ष 1997 में रिलीज हुई फिल्म 'परदेस' का हिस्सा माधुरी नहीं बनीं। फिर सुभाष ने महिमा चौधरी को पसंद किया। महिमा चौधरी ने इस फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की है। इससे पहले महिमा का नाम ऋतु चौधरी हुआ करता था। इस फिल्म के लिए सुभाष ने सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखक का फिल्मफेयर पुरस्कार पाया।
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ताल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
ताल (1999)
फिल्म ‘परदेस’ में सुभाष घई ने यशराज फिल्म्स का एनआरआई लव स्टोरी का फॉर्मूला अपनाना शुरू किया था। 1999 में रिलीज हुई फिल्म 'ताल' का म्यूजिक उन्होंने टिप्स म्यूजिक कंपनी को छह करोड़ रुपये में बेचा था। लेकिन, छोटे शहरों की कहानियों को मेट्रो शहरों में लाने का उनका प्रयोग यहीं से लड़खड़ाना शुरू हो गया। सुभाष घई ने ऐश्वर्या राय को इस फिल्म के लिए मनीषा कोइराला, करिश्मा कपूर, करीना कपूर और महिमा चौधरी के ना कहने पर चुना था। बॉक्स ऑफिस पर सुभाष घई की ये आखिरी कामयाब फिल्म मानी जाती है।
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