फिल्म सदमा का पोस्टर
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'सदमा' की वो 20 साल की लड़की जो पुरानी जिंदगी भूल चुकी है और वो सात साल की मासूमियत लिए एक छोटी बच्ची की तरह कमल हसन के साथ उसके घर पर रहने लगती है।
रेलवे स्टेशन का वो सीन जहां याददाश्त वापस आने के बाद ट्रेन में बैठी श्रीदेवी कमल हसन को भिखारी समझ बेरुखी से आगे बढ़ जाती है और कमल हसन बच्चों-सी हरकतें करते हुए श्रीदेवी को पुराने दिन याद दिलाने की कोशिश और करतब करते हैं, शायद हिंदी फिल्मों के बेहतरीन दृश्यों में होगा। एक ऐसी अदाकारा जो मोम की तरह किसी भी रोल में बखूबी ढल जाया करती थीं, 11 साल की उम्र में उन्होंने तेलुगू फिल्म में एक ऐसी बच्ची का रोल किया था जो देख नहीं सकती थी।
फिल्म चांदनी का पोस्टर
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या सफेद लिबास में ढली 'चांदनी' जो अपने मंगेतर के ठुकराए जाने से दुखी तो हैं पर किसी और के साथ दोबारा जिंदगी शुरू करने से हिचकिचाती नहीं भले ही वो कोशिश नाकाम रही। या फिर अपनी उम्र से दोगुने व्यक्ति से प्रेम करने का साहस करने वाली 'लम्हे' की पूजा। या फिर एक ही फिल्म में नरम और लड़क मिजाज वाली दो बहनों का रोल 'चालबाज' की मंजू और अंजू। या फिल्म 'मॉम' में अपनी बेटी के गैंगरेप का बदला लेने निकली मां का वो रूप जिसमें वो पूछती हैं कि अगर गलत और बहुत गलत में से चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे?
LAMHE
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ये पिछले ही साल की बात है कि श्रीदेवी ने फिल्मों में 50 साल पूरे किए और 54 साल की उम्र में उन्होंने जीवन को अलविदा कह दिया है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होंने लगभग पूरी जिंदगी फिल्मों में लगा दी। 51 साल पहले चार साल की एक छोटी-सी बच्ची तमिल सिनेमा की स्क्रीन पर नजर आई थीं। दरअसल पर्दे पर उन्होंने एक छोटे लड़के का रोल किया था। नाम था श्रीदेवी। तमिल-तेलुगू में चाइल्ड आर्टिस्ट का काम करते करते हुए वो हिंदी सिनेमा तक आ पहुंची, जब लोगों ने 1975 में उन्हें 'जूली' में बाल कलाकार के तौर पर देखा।
फिल्म सोलवां सावन का पोस्टर
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और यही श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की पहली सुपरस्टार कहलाईं। हालांकि उन्होंने बतौर लीड एक्टर सबसे पहले रजनीकांत के साथ 1976 में तमिल पिल्म में काम किया था जिसमें कमल हासन की खास भूमिका थी। 1978 में जब भारतीराजा की हिंदी फिल्म 'सोलवां सावन' में श्रीदेवी पर्दे पर आईं तो शायद ही किसी की नजर फिल्म पर पड़ी। श्रीदेवी का वजन उस समय था कोई 75 किलो और लोग उन्हें 'थंडर थाइज' कहते थे। फिर 1983 में 'हिम्मतवाला' रिलीज हुई। बड़ी-बड़ी आंखों वाली श्रीदेवी ने धीमे-धीमे अपने काम और अभिनय से सबका मुंह बंद करा दिया। उस जमाने में लोग उन्हें 'लेडी अमिताभ' भी कहते थे।
NAGINA
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उनके परिवार की बात करें तो पिता के. अयप्पन एक वकील थे और घर में बहन श्रीलता और भाई सतीश किसी जमाने में उनके पिता ने कांग्रेस के टिकट पर शिवकासी से चुनाव भी लड़ा था और श्रीदेवी ने अपने पिता के लिए चुनाव अभियान में हिस्सा भी लिया था। श्रीदेवी की मां ने शुरुआती दौर में उनके करियर में अहम रोल निभाया। कम्प्लीट एक्टर को बयां करते हुए जिन लोगों का नाम जहन में आता है, उसमें श्रीदेवी जरूर से एक हैं। कॉमेडी, एक्शन, डांस, ड्रामा हर विधा में वो माहिर थीं। 'मिस्टर इंडिया' के एक सीन में जहां वो चार्ली चैपलिन जैसे गेट अप में एक होटल में जाती हैं, उस सीन में अपनी कॉमिक टाइमिंग के जरिए उन्होंने सबको चारों खाने चित्त कर दिया था।
CHAALBAAZ
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डांस के मामले में भी वो अव्वल थीं, फिर वो 'हवा हवाई हो', 'मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हों' या 'नैनों में सपना' हो या फिल्म 'नगीना' का वो क्लाइमेक्स डांस जिसमें वो नागिन बनी थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कैसे फिल्म 'नगीना' में क्लाइमेक्स गाना और डांस शूट होना था और सेट एक ही दिन के लिए उपलब्ध था। सुबह उन्होंने डांस शूट करना शुरू किया और साथ ही सेट को तोड़ने का काम शुरू हो गया। खाली एक दीवार बची थी और उसी दायरे में श्रीदेवी को डांस करना था, लेकिन गाना देखने के बाद कभी इस बात का एहसास नहीं होता। हालांकि अपनी आवाज के लिए शुरू में उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी थी।
फाइल फोटो
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निजी जिंदगी की बात करें तो 90 के दशक में उनके जीवन में उथल पुथल मची जब बोनी कपूर के साथ उनकी शादी हुई जो पहले से शादीशुदा थे। बतौर निर्देशक बोनी कपूर के साथ वे कई फिल्में कर चुकी थीं और 1997 में फिल्म 'जुदाई' के बाद उन्होंने लंबा ब्रेक लिया। लेकिन 2012 में जब वो 'इंग्लिश विंग्लिश' में हिंदी फिल्मों में लौटीं तो ऐसा लगा ही नहीं कि वो कभी पर्दे से गई थीं। 'मर्द खाना बनाए तो कला है, औरत बनाए तो उसका फर्ज है'- फिल्म में जब वो ये डायलॉग बोलती हैं तो शशि के रोल में एक घरेलू महिला की दबी इच्छाओं, उसकी अनदेखी को बयां कर जाती हैं। पिछले साल 2017 में आई 'मॉम' उनकी आखिरी फिल्म रही। अपनी दोनों बेटियों के साथ श्रीदेवी का बड़ा लगाव था, किसी भी मां की तरह।
सोशल मीडिया पर अकसर वो अपनी बेटियों के साथ अपनी तस्वीरें डाला करती थीं।
MOM
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उनकी बेटी जाह्नवी की पहली फिल्म 'धड़क' पांच महीने बाद 20 जुलाई 2018 को रिलीज होने वाली है। अक्सर जब भी श्रीदेवी के ट्विटर पेज पर जाओ तो उनकी बेटी की पहली फिल्म 'धड़क' का पोस्टर सबसे ऊपर मिलता है जिसे उन्होंने पिन टू टॉप करके रखा था। वो अक्सर कहा करती थीं कि 'मदर इंडिया' उनका ड्रीम रोल था। 'मॉम' उनके करियर की आखिरी और 300वीं फिल्म थी। मुझे पिछले साल का एक इंटरव्यू याद है जब पति बोनी कपूर ने बहुत नाज से कहा था, 'श्रीदेवी ने एक्टिंग में 50 साल पूरे कर लिए हैं, उनकी 300वीं फिल्म आ रही है। आप जानती हैं और किसी ऐसे एक्टर को, ऐसे एक्टर और भी होंगे शायद। लेकिन 'चांदनी' की सी रोशनी बिखेरनी वाली, बड़ी बड़ी आंखों वाली श्रीदेवी एकदम जुदा थीं जिनकी फिल्में चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट छोड़ जाती हैं।
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फिल्म 'चालबाज' के एक सीन में रजनीकांत श्रीदेवी से तंग होकर उन्हें ताने मारते हैं, ये रोज-रोज नाच गाना तेरे बस का नहीं है, और श्रीदेवी चैलंज करते हुए कहती हैं, तुझे तो मैं ऑल इंडिया स्टार बनकर दिखाऊंगी....जिंदगी में उन्होंने ऐसा ही कर दिखाया। वो उन चंद अभिनेत्रियों में से थीं जिन्हें हिंदी, तमिल, तेलुगू फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। यहां तक कि केरल फिल्म इंडस्ट्री में भी उन्हें 1970 में बतौर बाल कलाकार सम्मानित किया गया था।