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Interview: कोरियाई फिल्म का रीमेक है 'भारत', निर्देशक ने रीमेक बनाने पर किया बड़ा खुलासा

Sat, 08 Jun 2019 07:27 AM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Ali Abbas Zafar, Bharat - फोटो : amar ujala
उत्तराखंड के एक फौजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले अली अब्बास जफर दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से थिएटर सीखकर जब मुंबई पहुंचे तो उनको पता भी नहीं था कि तकदीर ने उनके लिए क्या सोच रखा है। वह बस मेहनत करते गए और अब वह सलमान खान के साथ फिल्म भारत से कामयाब फिल्मों की हैट्रिक लगाने के मुहाने पर हैं। अली अब्बास जफर से एक खास मुलाकात।

फिल्म भारत के ट्रेलर में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आवाज के साथ सलमान की आवाज आती है, 71 साल पहले जब ये देश बना। इस वाक्य का क्या मतलब है, भारत देश तो सदियों से है?

हां, आपकी बात सही है भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्याताओं में से एक रहा है। लेकिन, मेरा आशय यहां तब से है जब दुनिया के नक्शे पर वह देश आया जिसे आज हम भारत के नाम से जानते हैं या कि कहें इसकी एक संगठित तौर पर पहचान बननी शुरू हुई। लेकिन फिल्म का मुद्दा ये नहीं है कि भारत कब बना, मुद्दा यहां ये है कि कहानी का नजरिया क्या है? एक परिवार है जो बंटवारे के वक्त बिछड़ गया। उसी की कहानी है ये।
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Ali Abbas Zafar - फोटो : file photo
तो भारत को आप एक देशभक्ति फिल्म मानते हैं?

जैसा कि आप जानते हैं मैं देहरादून से हूं। मेरे पिताजी सेना में थे। बाबा मेरे पुलिस में काम करते थे। मेरी परवरिश जिस परिवार में हुई वहां देशभक्ति हमें घुट्टी में मिलती है। लेकिन ये शोर मचाकर बताने वाली देशभक्ति नहीं है। देशभक्ति के बारे में मेरा ये मानना है कि जो भी जहां भी है, वहां रहते हुए वह ऐसा काम करे कि देश को उस पर नाज हो। हम बाहर जाते हैं तो पहचान पूछे जाने पर हम किसी को यह नहीं बताते कि हम हिंदू हैं या मुस्लिम। हम कहते हैं कि हम भारतीय हैं। बस यही मैं कहना चाहता हूं।
 
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Ali Abbas Zafar - फोटो : file photo
हिंदी सिनेमा में देशभक्ति फिल्में बनाने में मनोज कुमार अग्रणी रहे। फिल्मों में उनका नाम भी भारत ही होता था, तो उनसे कहीं कोई प्रेरणा?

मनोज कुमार की जो पहली फिल्म मैंने देखी, वह थी भगत सिंह। यह किरदार मेरा बहुत पसंदीदा किरदार रहा है। हिंदी सिनेमा में मनोज कुमार, यश चोपड़ा और ऋषिकेश मुखर्जी मेरे पसंदीदा फिल्ममेकर रहे हैं। देश के संस्कारों को लेकर इनकी फिल्मों का जो नजरिया रहा है, वह बहुत मजबूत है। मनोज कुमार की फिल्में जैसे उपकार या पूरब और पश्चिम, इनमें देशभक्ति जताने का नजरिया उस वक्त के हिसाब से ठीक था। अब समय नया है। अब हम बात को थोड़ा दूसरे तरीके से कहते हैं।

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Ali Abbas Zafar - फोटो : file photo
आपकी फिल्म का भारत कैसा है?

सलमान खान ने भारत का जो किरदार किया है, वह अपने पिता के बताए उसूलों पर चल रहा है। वह सही भी होता है। गलत भी होता है। गिरता भी है। संभलता भी है। मेरी फिल्म का एक संवाद है, देश लोगों से बनता है और लोगों की पहचान उनके परिवार से होती है। हमारा पूरा देश एक परिवार ही तो है। आज देश में एक ऐसा आदमी जो अपने परिवार को सुखी रख सके, वही सबसे बड़ा हीरो है।
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Ali Abbas Zafar
तो सलमान के साथ बतौर निर्देशक रिश्ते कैसे रहे?

उनके साथ जब पहली फिल्म सुल्तान बनाई तो शुरूआती दिक्कतें जरूर रहीं। हमें एक दूसरे को समझने में वक्त भी लगा। मैं अपनी फिल्में लिखता भी हूं और सुल्तान की स्क्रिप्ट उन्हें बहुत पसंद आई। फिर टाइगर जिंदा है के दौरान हमारे रिश्ते और सहज हुए। भारत बनाने का विचार सलमान का ही था, उन्होंने मुझे कोरियाई फिल्म ओड टू माई फादर देखने को दी। मैंने अपने करियर में कभी किसी फिल्म की रीमेक बनाने का सोचा तक नहीं था। लेकिन इस फिल्म ने मुझे हिला दिया। फिर हमने इसकी आज की जरूरतों और अपने देश के इतिहास के हिसाब से नई स्क्रिप्ट लिखी। एक साल की रिसर्च के बाद जब पहला ड्राफ्ट तैयार हुआ तो वह समझ गए कि पिक्चर डायरेक्टर को समझ आ रही है।
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Bharat film poster - फोटो : twitter
भारत का जो पहला गाना रिलीज हुआ, वह फिल्म के हिसाब से 60 के दशक का गाना है, लेकिन सुनने में बिल्कुल आज के दौर का गाना लगता है, आपको नहीं लगता भारत का संगीत इसकी कहानी के हिसाब से गड़बड़ है?

भारत के संगीत को लेकर मेरी इसके संगीतकारों विशाल शेखर से भी बहुत बहस हुई। मेरा तर्क ये है कि मैं ये फिल्म आज के युवाओं के लिए बना रहा हूं। मैंने बहुत सोच समझकर फिल्म का म्यूजिक आज के जमाने का रखने का फैसला लिया। इसकी प्रेरणा मुझे पश्चिमी देशों की फिल्मों से मिली। वहां भी पीरियड फिल्मों का म्यूजिक सामयिक ही रहा है। मेरा मकसद ये है कि फिल्म का म्यूजिक आज की पीढ़ी की पसंद हो और फिल्म के किरदार ऐसे हों कि युवा पीढ़ी को अपने मां-बाप के मजबूत संस्कारों की जानकारी मिल सके।
 
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sultan - फोटो : file photo
एक सवाल आपकी फिल्म सुल्तान को लेकर है। जब आपको पता चला कि सुल्तान और दंगल की कहानी एक जैसी हैं, तो आपका पहली प्रतिक्रिया क्या रही?

सच पूछिए तो मैं हिल गया था। लेकिन मैं और दंगल के निर्देशक नितेश तिवारी एक दूसरे को बरसों से जानते हैं। मैंने उनसे कहा कि आप मेरी फिल्म की पटकथा पढ़ लो और मैं आपकी स्क्रिप्ट पढ़ लेता हूं। वह आए और हम लोगों ने बैठकर अपनी अपनी फिल्म की कहानी साझा की तब हमें समझ आया कि दोनों फिल्मों की जमीन बिल्कुल अलग है।
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अली अब्बास जफर - फोटो : AmarUjala
आज के नंबर वन हीरो रणवीर सिंह को आपने तब निर्देशित किया, जब उनका करियर कुलबुलाना शुरू हुआ था, क्या खासियत है इस शख्स में जो आज वह यहां तक आ पहुंचा?

जब रणवीर हीरो बने भी नहीं थे और मैं निर्देशक नहीं बना था, तब से हम दोस्त हैं। हम दोनों शाद अली की टीम में साथ काम करते थे। रणवीर की सबसे बड़ी खासियत है कि वह खुद को सही या गलत के तराजू में नहीं तौलता है। वह एक पैदाइशी कलाकार है जिसे लोगों को खुश रखने में उनका दिल बहलाने में मजा आता है। अभी इसी कमरे में आकर वह आपको इस बात का एहसास करा देगा कि आप उसके पुराने रिश्तेदार हैं। उसे कुछ भी बना दो, सिम्बा बना दो, गली बॉय बना दो, उसे हर किरदार को जीने से मोहब्बत है। और, ऐसा नहीं कि सुपरस्टार है, इसलिए मैं उसके बारे में ये कह रहा हूं, वह शुरू से ऐसा ही है।
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