राजश्री का पारिवारिक फिल्में बनाने का इतिहास रहा है, अब फिर वैसी ही फिल्में हिट हो रही हैं जिन्हें पूरा परिवार साथ में देखे। क्या राजश्री का मूल विचार ही इन फिल्मों की कामयाबी का मूल मंत्र है?
मैं बहुत खुश हूं कि वह दौर फिर से लौट आया है जिसमें पूरा परिवार साथ बैठकर फिल्म देख रहा है। मेरा मानना है कि फिल्म हो, टीवी हो या ओटीटी हो, सब परिवार पर ही आधारित हैं। आप कितना भी अकेले देख लो लेकिन जहां कहानी है, वहां बांट कर ही मजा आता है। राजश्री की फिल्में देखना एक पिकनिक मनाने जैसा होता है। मुझे बहुत खुशी होती है जब अमित शर्मा की 'बधाई हो', लव रंजन 'दे दे प्यार दे' या गौरी शिंदे हैलो जिंदगी इंग्लिश विंग्लिश बनाते हैं। फिल्म बनाना और देखना एक उपचार है। मैं अपनी कमियों के बावजूद 'बाला' की तरह पूर्ण हूं, ये किसी को शिक्षा देने से समझ में नहीं आएगा।