'चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान', सम्राट पृथ्वीराज चौहान को यह बात उनके विश्वस्त चंदबरदाई ने उस समय समझाई, जब उन्हें बंदी बनाकर मोहम्मद गोरी अपने देश ले गया। वहां पृथ्वीराज चौहान को कई यातनाएं सहनी पड़ीं। धातु की गर्म छड़ों से पृथ्वीराज की आंखें फोड़ दी गईं। प्रचलित धारणाओं के मुताबिक चंदबरदाई को अपने परम मित्र के साथ ये दुर्भाव तनिक भी नहीं भाया। चंदबरदाई ने अपनी किसी तरह मुहम्मद गोरी का विश्वास जीता और उसका प्रिय भी बन गया। और, एक दिन, चंदबरदाई ने पृथ्वीराज की ‘शब्दभेदी बाण’ चलने की क्षमता को मुहम्मद गोरी के सामने बहुत आकर्षक ढंग से बताया। इसके आगे का किस्सा बताने से पहले बात इसके जिक्र की वजह की। यशराज फिल्म्स की पिक्चर ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में चंदबरदाई बने सोनू सूद का मानना है कि इस फिल्म में बहुत कुछ ऐसा है जो इसके निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी की अपनी सोच की उपज रहा है।