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सिद्धार्थ मल्होत्रा जिएंगे कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की जिंदगी, करेंगे डबल रोल!

Mon, 04 Sep 2017 04:59 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा, सिद्धार्थ मल्होत्रा
कारगिल युद्ध में शहीद हुए 'परमवीर चक्र' विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा की जिंदगी पर फिल्म बनने जा रही है। महज 24 साल की उम्र में देश के लिए कुर्बान हो जाने वाले विक्रम बत्रा के कारनामे रोंगटे खड़े करने वाले है। पाकिस्तानी आर्मी में विक्रम बत्रा के नाम का खौफ था। विक्रम बत्रा के बारे में कोई मैसेज होता, तो उसे 'शेरशाह' के नाम से पास किया जाता। बॉलीवुड 'एलओसी कारगिल' के बाद ऐसा मौका दोबारा लाया है, जब हमारी नई पीढ़ी 'शेरशाह' को पर्दे पर देखेगी। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा लीडिंग रोल में होंगे। आगे की स्लाइड में जानें, परमवीर कैप्टन की बहादुरी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की इस फिल्म के बारे में...
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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
इस फिल्म का नाम अभी तय नहीं हुआ है। पर इसके बारे में साफ है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा ये फिल्म करने जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सिद्धार्थ को कैप्टन बत्रा पर बेस्ड ये स्टोरी बेहद पसंद आई है। रिसर्च टीम ने इसके लिए कैप्टन बत्रा के दादा जी से भी मुलाकात की है, जो खुद भी आर्मी से रिटायर्ड हैं। इस प्रोजेक्ट को सभी से मंजूरी मिल चुकी है। आगे जानें, विक्रम बत्रा की जिंदगी में क्या है डबल रोल की अहमियत...
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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा के बारे में सभी लोग जानते हैं। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि कैप्टन विक्रम बत्रा 'जुड़वा' के तौर पर पैदा हुए थे। उनके भाई का नाम विशाल है। साथ ही ये बात भी है कि विक्रम और विशाल को घर वाले 'लव और कुश' के नाम से बुलाते थे। दोनों भाई हमशक्ल भी रहे। यही वजह है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा इस फिल्म में डबल रोल करेंगे। आगे की स्लाइड में जानें, कैप्टन बत्रा की बहादुरी और उनके मशहूर डायलॉग्स के बारे में...

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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
'ये दिल मांगे मोर' कैप्टन बत्रा का यही कोड था प्वॉइंट 5140 कैप्चर करने के बाद। उनका ये संदेश जब इंडियन आर्मी के अफसरों तक पहुंचा, खुशी की लहर दौड़ गई। ये वो समय था, जब दुश्मन हर मोर्चे पर 'एडवांस' था और हमारे जवानों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। इस प्वॉइंट को फतह करने के बाद उन्हें आराम करने को कहा गया। पर उन्होंने प्वॉइंट 5100, प्वॉइंट 4700 जंक्शन पीक और थ्री पिंपल कॉम्प्लेक्स को भी फतह किया। आगे जानें, प्वॉइंट 4875 को फतह करने की कहानी और एक 'खास' कहानी के बारे में...
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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा 9 सितंबर 1999 को शहीद हुए थे। वो प्वॉइंट 4875 को फतह कर चुके थे। पर इस बीच अपने घायल साथी को बचाने के लिए वो दुश्मनों की काउंटर फायरिंग में उलझ गए। दुश्मनों की काउंटर फायरिंग के दौरान उन्होंने अपने साथी को उसके परिवार और बच्चों का वास्ता देकर पीछे हटाया। और खुद शहीद हो गए। आखिरी स्लाइड में जानें, 'मैं आउंगा जरूर...' की कहानी...
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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर थे और लड़ाई के मैदान में ही कैप्टन बनाए गए। इससे भी पहले वो जब ट्रेनिंग के बाद होली के त्यौहार पर अपने घर गए थे, तो अपनी मित्र से मिलने कॉफी हॉउस पहुंचे थे। यहां जब उनसे सावधान रहने को कहा गया, तो विक्रम ने कहा था, 'या तो मैं तिरंगा लहराकर आउंगा, या फिर तिरंगे में लिपटा चला आउंगा। पर आउंगा जरूर...' ये डायलॉग आप 'एलओसी कारगिल' फिल्म में भी सुन चुके होंगे...
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