सिद्धार्थ मल्होत्रा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इसके बावजूद आप यहां तक आ गए तो इसमें किसका योगदान सबसे ज्यादा मानते हैं?
कह सकते हैं कि उस पहले झटके के बाद ही मेरी असली संघर्ष यात्रा शुरू हुई। पहले घर ढूंढो, फिर ऑडीशन होने वाली जगहें ढूंढो। हर ऑडीशन के लिए 30-40 लोग तो आते ही हैं। सब एक से एक काबिल और धुरंधर लोग होते हैं और ऐसे ही मौके पर एक बात जो किसी एक को ये मौका दिला देती है, वह है किस्मत और इसके लिए हमें हमेशा ईश्वर का शुक्रगुजार होना चाहिए। मेरा यह पक्का भरोसा रहा है कि इंसान जैसे कर्म करता है, उसका फल उसे इसी जीवन में भुगतना ही होता है। आप जो भी करोगे, किसी दिन वह घूमकर आप तक आएगा जरूर। सच पूछिए तो मेरी तीसरी फिल्म ‘एक विलेन’ की कामयाबी को मैं ईश्वरीय चमत्कार ही मानता हूं। हममें से किसी को उम्मीद नहीं थी कि ये फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित होगी।