फिल्म इंडस्ट्री चमक-धमक वाली वो दुनिया है, जो हर किसी को आकर्षित कर लेती है। हर साल सैकड़ों लोग छोटे शहरों से निकलकर मायानगरी में अपना सपना साकार करने के लिए आते हैं। यहां आकर किसी को मंजिल मिल जाती है तो कोई साइड कैरेक्टर बनकर रह जाता है। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो जिंदगी भर एक ब्रेक के लिए मशक्कत करते रह जाते हैं, लेकिन उन्हें कोई मौका नहीं मिलता। बॉलीवुड से लेकर दक्षिण सिनेमा और भोजपुरी इंडस्ट्री तक में ऐसी कई कहानियां देखने को मिलती हैं। इनमें कुछ तो प्रोत्साहित करती हैं, वहीं कुछ ऐसी भी हैं जो चकाचौंध के पीछे छिपे लोगों के असली रूप से आपको रुबरू करवाती हैं। ये सिलसिला आज से नहीं बल्कि सदियों से चला आ रहा है। अब तो बॉलीवुड ने सौ साल से ज्यादा पूरे कर लिए हैं, लेकिन इस स्थिति में कुछ बदलाव देखने को नहीं मिला है। अन्य राज्यों से आए कलाकरों के साथ तो ऐसा होता ही है, लेकिन खुद मंबई में जन्में एक अभिनेता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। वो कोई और नहीं बल्कि खुद श्रेयस तलपड़े हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई।