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Exclusive: 'शूरवीर' के लिए मकरंद देशपांडे और मनीष चौधरी ने लुक में किए बड़े बदलाव, खास बातचीत में खोले कई राज

Tue, 12 Jul 2022 10:16 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मकरंद देशपांडे-मनीष चौधरी - फोटो : सोशल मीडिया
अभिनेता मकरंद देशपांडे इन दिनों अपनी आगामी वेब सीरीज 'शूरवीर' को लेकर चर्चा में हैं। मकरंद देशपांडे को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। वह एक शानदार एक्टर, डायरेक्टर और उतने ही शानदार राइटर हैं। अपने अभिनय कौशल से वह पर्दे पर किसी भी किरदार को जीवंत करने में माहिर हैं। इस वेब सीरीज में दर्शकों को उनका एक अलग अंदाज देखने को मिलेगा। वह इसमें रॉ एजेंट बने हैं। यह वेब सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर आगामी 15 जुलाई को रिलीज होगी। मकरंद देशपांडे के अलावा इस सीरीज में मनीष चौधरी भी अहम किरदार निभाते नजर आएंगे। हाल ही में दोनों अभिनेताओं के साथ अमर उजाला की खास बातचीत हुई। इस दौरान 'शूरवीर' से लेकर फिल्म और इंडस्ट्री के तमाम पहलुओं पर चर्चा की गई। आइए जानते हैं इस दिलचस्प इंटरव्यू की कुछ अहम बातें....
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मकरंद देशपांडे - फोटो : सोशल मीडिया
'शूरवीर' के लिए ऐसे बनी बात 
वेब सीरीज 'शूरवीर' में जब मकरंद देशपांडे से उनके किरदार और उसकी चुनौतियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मेरा किरदार मुझसे ज्यादा तो क्रिएटर्स और मेकर्स के लिए चैलेंजिंग था। मैं सोचता हूं कि जगरनॉट प्रोडक्शंस के समर खान और कनिष्क शर्मा को उस वक्त कैसा लगा होगा जब उन्होंने सोचा होगा कि 'स्वदेश' का एक मस्तमौला आदमी नेशनल सिक्योरिटी का आदमी बन सकता है, रॉ एजेंट बन सकता है। कमाल की बात यह रही कि जब इस रोल के लिए उन्होंने मुझे बुलाया तो मेरी दाढ़ी सही सलामत थी। वहां क्रिएटिव सुपरवायजर मौजूद थीं। मैं ऑफिस में सिर्फ यही कहने गया था कि मैं यह रोल नहीं कर पाऊंगा।' मकरंद देशपांडे आगे कहते हैं, 'जब मैं मना कर रहा था तो उसी दौरान मुझे बताया गया कि यह प्रोजेक्ट कितना महत्वपूर्ण है। मुझे समझाया गया कि निर्देशक कनिष्क शर्मा से मिले बिना न जाऊं। जब वह आए तो उन्होंने कहा कि यह अपना प्रोजेक्ट है। आप मेरे साथ काम करने जा रहे हैं। फिर मुझे भी लगा कि न कहने की कोई मजबूत वजह तो नजर नहीं आ रही। इसलिए प्रोजेक्ट के लिए हामी भर दी। और फिर अहसास हुआ कि आप खामखां कुछ चीजों से दूरी बनाए रखते हो। सच बताऊं तो सीरीज में मेरे किरदार के लिए जब मेरे बाल काटे गए तब मुझे लगा कि मैं गलत रास्ते पर था।'
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मकरंद देशपांडे - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
नहीं नजर आएगा मकरंद देशपांडे का सेंस ऑफ ह्यूमर 
अब तक के आपके सभी किरदारों में आपका सेंस ऑफ ह्यूमर दिखाई देता है। 'शूरवीर' में आपका किरदार कैसा है और कितना मौका मिला खुद मकरंद देशपांडे को दिखाने का? इस सवाल के जवाब में मकरंद देशपांडे कहते हैं, 'इस सरीज में मेरा किरदार काफी सीरियस है। कई जगहों पर इंसान को अपना सेंस ऑफ ह्यूमर त्यागना पड़ता है। मैं इस सीरीज में नेशनल सिक्योरिटी का हिस्सा हूं। तो ऐसी जगह पर सेंस ऑफ ह्यूमर घर पर रखना पड़ता है, ताकि कहीं भी लूज टॉक न हो। हर तरह से गंभीर दिखना पड़ता है। इसलिए, ऐसे किरदारों में ह्यूमर आ ही नहीं सकता। 'शूरवीर' में मेरा रोल ऐसी जगह आता है, जहां परिस्थिति बेहद तनावपूर्ण हैं। एक मुल्क की सुरक्षा की बात हो रही है। आक्रमण हुआ है दुश्मन का और उसकी बात हो रही है तो सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए कोई जगह बचती ही नहीं है।'

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मकरंद देशपांडे - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अच्छा इंसान बनना प्राथमिकता हो
मकरंद देशपांडे को लेखक कहा जाए, एक्टर या एक डायरेक्टर? आपको अपना कौन सा किरदरा अच्छा लगता है? इस सवाल पर मकरंद देशपांडे ने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि बेहतर इंसान होना सबसे जरूर है। अगर आप इंसान अच्छे बन गए तो आपके विचार करने की शक्ति आपसे सही काम कराती है। एक साफ सुथरी सोच आपसे अच्छा लिखवाती भी है। जब अच्छा लिखेंगे तो तालमेल आ ही जाता है। तालमेल आ गया तो एक्टिंग अच्छी होगी। एक्टर को लाइफ शूटर होना पड़ता है। जहां तक आप मुझसे पूछेंगे तो कहूंगा कि आखिर लेखक बनना किसे पंसद नहीं है? वहीं, थिएटर को लेकर कह सकता हूं कि मैं लेखक हूं निर्देशक हूं। अब सिनेमा और ओटीटी की तरफ आ रहा हूं।'
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मकरंद देशपांडे - फोटो : सोशल मीडिया
क्रिएशन में ईमानदारी की जरूरत है
क्या आजकल रीजनल सिनेमा में बेहतर काम करने को मिल रहा है। ऐसा कुछ जो हिंदी में नहीं हो रहा था। आपको क्या लगता है? इस पर मकरंद पांडे ने कहा, 'मेरे हिसाब से जो दूर होता है वो हमेशा आपको पसंद ही आता है। आप चाहें तो साहित्य की बात कर लें, कोई किताब उठा लें या उस संस्कृति की बात जिसे आप नहीं जानते हैं, उसके बारे में जानकर आपको अच्छा लगेगा। दरअसल नयापन अच्छा लगता है। फिर यह नयापन तो आपके ही देश का है।' उन्होंने आगे कहा, 'रीजनल सिनेमा में एक बजट फिक्स होता है। हिंदी और साउथ का जो एक मुख्य फर्क है वह यह है कि साउथ का ज्यादा पैसा फिल्म में लगता है। एक्टर जो होता है वो ज्यादा पैसा घर नहीं ले जाता। ज्यादा पैसा फिल्म पर लगा होता है तो वह नजर भी आता है। स्क्रीन पर एक अलग ही ऊर्जा नजर आती है। यह आज की बात नहीं है। यह चलन वहां शुरुआत से है। मैं बॉलीवुड का भी हिस्सा रहा हूं। मुझे लगाव है इस इंडस्ट्री से। बस यहां यह देखा जाए कि पैसा कहां जा रहा है तो चीजें बेहतर हो सकती हैं। जैसे 'शूरवीर' पर बहुत पैसा खर्च किया जा रहा है। अगर क्रिएशन में ईमानदारी आएगी को बॉलीवुड फिल्में भी चलेंगी। 

मकरंद देशपांडे के साथ मनीष चौधरी से भी हुई दिलचस्प बातचीत, पढ़िए...

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मनीष चौधरी - फोटो : सोशल मीडिया
लुक पर किया काफी काम
'शूरवीर' में आपका लुक कैसा रहा? क्या तैयारी की? इस पर मनीष चौधरी ने कहा, 'इस सीरीज मे मैं रंजन मलिक का रोल प्ले कर रहा हूं, जो स्पेशल फोर्सेज कमांडर हैं। सभी जानते हैं कि स्पेशल फोर्सेज के जो पर्सनल होते है वो हर मिलिट्री के टॉप वन पर्सेंट के पर्सनल होते हैं, जो स्पेशल फोर्सेज में जाते हैं। तो उनकी एक निश्चित तरीके के फेशियल हेयर होते हैं। उनका डील-डौल भी अलग होता है। तो मेरी कोशिश थी कि अगर मुझे यह किरदार निभाने को मिल रहा है तो विजुअल में सही होना चाहिए। मुझे लगता है कि किरदार के लुक पर अगर ठीक से काम किया जाए तो आधा काम हो जाता है।'
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मनीष चौधरी - फोटो : सोशल मीडिया
'किरदार हमें खुद चुनते हैं'
आप अपने किरदारों को किस तरह से चुनते हैं? इस पर मनीष चौधरी का कहना है, 'मैंने कभी किसी चीज का चुनाव नहीं किया। काम ही आपका चुनाव करता है। अगर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर्स को लगता है कि आप ही उस काम के लिए सही होंगे तो वो आपको बुलाएंगे। मुझे नहीं लगता कि मैंने आज तक एक बार भी ऐसा किया है कि किसी काम का चुनाव किया हो। इसे आप खुशकिस्मती कह लीजिए या कुछ भी मुझे कभी नहीं मिली। हालांकि, वक्त के साथ आपको यह जरूर पता चलता है कि आपका रुझान किस ओर है। कौन-सा काम आप ठीक से कर सकते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, वैसे ही दिशाएं खुलनी शुरू होती हैं।'
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'शूरवीर' - फोटो : सोशल मीडिया
लुक पर दिया खास ध्यान
'शूरवीर' में रोल कितना चैलेंजिंग रहा? इस पर अभिनेता ने कहा, 'मुझे हमेशा से यही लगता है कि किरदार को बनाने के लिए जो तैयारी की जाती है, उसमें लुक महत्वपूर्ण होता है। मैं अपने किरदारों के लिए कोशिस करता हूं कि उनकी पोशाक, हेयरस्टाइल के बारे में सोचा जाए। फिर बाकी चीजें कहानी तय करती है। मिलिट्री की दुनिया है तो इसका पूरा एक अलग तरीका होता है।' आप एक ऐसे अभिनेता हैं, जिन्हें किसी ड्रामा स्कूल में जाने का मौका नहीं मिला। ऐसे में ओटीटी ने आप जैसे एक्टर्स के लिए क्या संभावनाएं पैदा की हैं? इस पर मनीष चौधरी ने कहा, 'इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो मैं हूं। यह ओटीटी के कारण है कि हम और आप आज बात कर पा रहे हैं। ओटीटी का जो माध्यम है वह रियलिटी की तरफ ज्यादा देखता है।'
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