बात जब भी हिंदी सिनेमा की जोड़ियों की आती है तो उनमे शम्मी कपूर और गीता बाली की जोड़ी को भी शान से शामिल किया जाता है। कई जोड़ियां ऐसी रही हैं जिनका प्रेम किसी अमर प्रेम से कम नहीं। ऐसे ही प्रेम वाली जोड़ी थी शम्मी कपूर और गीता बाली की।
इस जोड़ी का मिलन जितना रोचक था इनकी शादी की कहानी उतनी ही दिलचस्प।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
गीता बाली और शम्मी कपूर की मुलाकात केदार शर्मा की फिल्म 'रंगीन रातें' के सेट पर हुई। गीता बाली उन दिनों हिंदी सिनेमा में अपने पैर जमा चुकी थी, जबकि कपूर खानदान से ताल्लुक रखने के बावजूद शम्मी कपूर फिल्में हासिल करने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। गीता बाली की सिफारिश पर ही शम्मी कपूर को ये फिल्म मिली थी,
इसलिए जब सेट पर दोनों की मुलाकात हुई तो शम्मी कपूर गीता बाली के स्टारडम के कारण उनसे बात करने में हिचक रहे थे, लेकिन जल्द ही दरियादिल गीता बाली ने अपने इस फिल्मी हीरो की हिचक को हवा में उड़ा दिया। गीता की दरियादिली, बड़ी-बड़ी आँखें और मोहक मुस्कान में खुद को भुला बैठे थे शम्मी कपूर।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
शम्मी कपूर में एक गजब का अल्हड़पन था। ये मस्तमौला गीता को भी रास आने लगा। आउटडोर शूटिंग पर रानीखेत गयी फिल्म की टीम और निर्देशक केदार शर्मा की तीखी नजरों के बीच शुरू हुआ मुलाकातों का सिलसिला टीम की वापसी तक पूरा परवान चढ़ चुका था। मुंबई पहुँचने तक दोनों जीने-मरने की कसम खा चुके थे, लेकिन शम्मी कपूर को बखूबी पता था कि ये इतना आसन भी नहीं होगा।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
गीता बाली न केवल उनसे उम्र में बड़ी थी बल्कि वो 'बावरे नैन' में बड़े भाई राजकपूर और 'आनंदमठ' में पिता पृथ्वीराज कपूर की हीरोइन भी रह चुकी थीं। उस पर शम्मी का हिचकोले खाता फिल्मी करियर। जाहिर था कि कपूर खानदान शम्मी को शादी की रजामंदी नहीं दे सकता था,
लेकिन शम्मी थे कि गीता के लिए हर हद्द तोड़ने को तैयार बैठे थे। परिवार की नाखुशी उन्हें और बेकरार किये जा रही थी। गीता बाली शम्मी की इस परेशानी को समझ रही थी, लेकिन वो कर भी क्या सकती थी।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
खैर, जब बात नहीं बनी तो शम्मी कपूर ने अपने खानदान के खिलाफ जाने का फैसला कर लिया और फिर एक दिन शम्मी कपूर गीता बाली के साथ मुंबई में एक मंदिर में शादी करने के लिए जा पहुंचे।
शम्मी कपूर जब मंदिर पहुंचे तो मंदिर के दरवाजे बंद हो चुके थे, इसलिए पुजारी ने उनकी शादी कराने से इंकार कर दिया।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
शम्मी की जिद्द और हालात को देखते हुए पुजारी ने उन्हें सुबह आने की सलाह दी और ये आश्वासन भी दिया कि मंदिर के कपाट खुलते ही शादी की पूरी रस्म अदा कर दी जाएगी। सबेरे चार बजे शम्मी मंदिर के सामने हाजिर थे और फिर जैसे-तैसे दोनों की शादी भी हो गई।
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शम्मी कपूर, गीता बाली
गीता बाली से शादी करने के बाद जैसे शम्मी की रूठी किस्मत जाग उठी। शादी के बाद गीता ने न केवल शम्मी की खिलनदडेपन पर लगाम कसी बल्कि उनके करियर की बागडोर भी अपने हाथों में ले ली। गीता बाली के साथ ने न केवल शम्मी को अनुशासित किया बल्कि उनमे एक जिम्मेदारी भी पैदा की जिसकी वजह से वो करियर को लेकर काफी गंभीर हो गए। 1957 में आई नासिर हुसैन की फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' की धमाकेदार कामयाबी ने शम्मी के करियर का रुख ही बदल कर रख दिया।
शम्मी का बदला अंदाज, लुक और ओ.पी.नय्यर का म्यूजिक दर्शकों को खूब रास आया और शम्मी रातोंरात स्टार हो गए...लेकिन गीता और शम्मी का ये साथ ज्यादा दिनों तक नहीं रह सका। गीता को चेचक की बीमारी हो गई। बीमारी मामूली थी लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका।