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Satyadeep Mishra Interview: आईआरएस की नौकरी, अदिति राव से शादी, वकालत, पहली पसंद का कुछ नहीं भाया सत्यदीप को

Wed, 01 Feb 2023 12:40 PM IST
मेघा चौधरी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनेता सत्यदीप मिश्रा कमाल के कलाकार हैं। पुलिस की वर्दी उन पर खूब फबती है। लेकिन, उनका पहला पेशा भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की नौकरी बना। इनकम टैक्स में वह असिस्टेंट कमिश्नर बने। लंबे समय तक कॉरपोरेट की दुनिया में वकील भी रहे। और,  फिर जब मन को ये सब नहीं भाया तो एक दिन गाड़ी-घोड़ा समेत पहुंच गए मुंबई। खानदानी विरासत अच्छी है। अदिति राव हैदरी से शादी की। लेकिन यहां पहली मोहब्बत रास नहीं आई। और फिर अभी बीते महीने उन्होंने पूर्व क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स और अभिनेत्री नीना गुप्ता की बेटी मसाबा से दूसरी शादी कर ली। मसाबा की पहली शादी फिल्म निर्माता मधु मंटेना से हुई थी। सत्यदीप मिश्रा से हाल में मुलाकात हुई उनकी नई वेब सीरीज 'जहानाबाद- ऑफ लव एंड वार' को लेकर। आइए जानते हैं उनकी इस वेब सीरीज और उनके जीवन की उन सारी पहली व दूसरी पसंदों के बारे में जो उनकी शख्सियत को काफी दिलचस्प बना देती हैं।
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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सत्यदीप, ये वेब सीरीज 'जहानाबाद- लव एंड वार' क्या 13 नवंबर 2005 के दिन हुए जहानाबाद जेल ब्रेक पर आधारित है?
नहीं, हमारी वेब सीरीज 'जहानाबाद- लव एंड वार' उस घटना पर आधारित नहीं हैं, लेकिन कहानी की पृष्ठभूमि वही है। जातिवाद की बातें इसमें भी हैं। मैं एसपी जहानाबाद का किरदार निभा रहा हूं। इस सीरीज की बैक स्टोरी यह है कि जहानाबाद जेल में बंद नक्सली नेता दीपक और मैं कॉलेज में साथ पढ़े हैं। दीपक अपराध की दुनिया में चला जाता है और मेरा किरदार पुलिस विभाग में। पुलिस कप्तान चाहकर भी दीपक के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसके ऊपर राजनीतिक दबाव बहुत है।
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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
थोड़ा पीछे चलते हैं और आपकी पहली फिल्म नो वन किल्ड जेसिकाकी बात करते हैं..
देखा जाए तो मेरी पहली फिल्म 'चिल्लर पार्टी' थी लेकिन रिलीज 'नो वन किल्ड जेसिका' पहले हुई। 'चिल्लर पार्टी' इसके हफ्ते भर बाद रिलीज हुई और उसी साल मेरी एक और फिल्म 'टर्निंग 30' भी रिलीज हुई जिसकी निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव हैं। तीनों फिल्में साल 2011 में  दो हफ्तों के अंदर ही रिलीज हो गईं। जहां तक कैमरे के सामने पहले ब्रेक की बात है तो इसका क्रेडिट मैं कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को देना चाहूंगा। उन्होंने ही सबसे मुझे विज्ञापन फिल्मों में मौका दिलाया। 'चिल्लर पार्टी' और 'बॉम्बे वेलवेट' में मुकेश के जरिये ही मिलीं। 'नो वन किल्ड जेसिका' में मुझे कास्टिंग डायरेक्टर गौतम कृष्णनंदानी ने मौका दिलाया, अब कास्टिंग में बड़ा नाम बन चुके अभिनेता अभिषेक बनर्जी उन दिनों उनके असिस्टेंट हुआ करते थे।

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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तो पहले ब्रेक की कुछ यादें हैं अभी जेहन में?
मुंबई आने के बाद सबसे पहले पहने एक विज्ञापन की शूटिंग की थी। फिल्म का पहला शूट 'चिल्लर पार्टी' का था। लेकिन फिल्म 'नो वन किल्ड जेसिका' के पहले दिन की शूटिंग पर जब मैंने अभिनेत्री रानी मुखर्जी के फ्रेम शेयर किया तो लगा कि हां अब कुछ बात बन रही है। उस दिन शूटिंग खत्म होने पर लोगों ने मेरा काफी हौसला बढ़ाया और तारीफ भी की। बस उसके बाद गाड़ी चल निकली।

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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
एक जमा जमाया करियर छोड़कर यूं मुंबई आने में डर नहीं लगा?
मेरा मानना है कि आपको कामयाबी वही चीज दिलाती है, जिसे करने में पहले आपको डर लगता है। मैं 12-13 साल तक वकालत करने के बाद मुंबई आया। पैसे इतने थे मेरे पास कि यहां एक घर आते ही खरीद लिया। मेरे पास तीन गाड़ियां थीं, उनमें से दो को मैं मुंबई ले आया। लेकिन बचत भी कितने दिन चलती। धीरे धीरे पैसे खत्म होने लगे। दोनों गाड़ियों की ईएमआई भरना ही तब मेरी कमाई का एकमात्र लक्ष्य होता था। लगता था किसी तरह बस 35 हजार रुपये का जुगाड़ हो जाए तो काम चल जाएगा। कभी कभी महीने में 50 हजार रुपये कमा लेता तो ऐश हो जाती थी।
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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : सोशल मीडिया

इतने साल वकालत करने के बाद एकाएक अभिनय में आने का ख्याल कैसे आया?
वकालत मेरी पहली पसंद थी भी और नहीं भी। मुझे ये करना नहीं था लेकिन सिविल सेवा की परीक्षा के लिए लोगों ने लॉ पढ़ने की सलाह दी। इस तरह वकील बन गए। भारतीय राजस्व सेवा में भी चयन हो गया लेकिन वहां 11 महीने नौकरी के बाद इस्तीफा दे दिया और फिर से वकालत करने लगा। मैं साल 2009 में सब कुछ छोड़ छाड़कर मुंबई पहुंचा। मुझे तब ऐसा लगता था कि जिंदगी मुझसे कुछ और चाह रही है लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या है। 

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सत्यदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
और, ये क्या है, ये कैस समझ आया?
कोई 20 साल पहले वकालत के दौरान ही मैं पहली बार कैमरे के सामने आया। ट्रैवेल शो 'द ग्रेट एस्केप' और 'लिविंग इन द एज' में मेजबानी का मौका मिला था और यहीं से मेरे भीतर कैमरे के सामने कुछ न कुछ करते रहने का प्रेम जागा। तब मैं 35 साल का था। घर में हमारे किसी काम को करने की मनाही नहीं थी। घरवालों का यही कहना था कि पढ़ाने लिखाने तक उनकी जिम्मेदारी रही आगे क्या करना है ये मुझे ही देखना होगा। बस, फिल्मों में 'चिल्लर पार्टी' से जो सफर शुरू हुआ वह 'विक्रम वेधा' तक आ पहुंचा है।
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सत्यदीप मिश्रा और मसाबा गुप्ता की शादी की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
और, ओटीटी भी इन दिनों आको खूब रास आ रहा है..
ओटीटी पर मेरी शुरुआत 'इललीगल सीजन वन' से हुई, उसके बाद एमएक्स प्लेयर के लिए 'थिंकिस्तान' किया। नेटफ्लिक्स के शो 'मसाबा मसाबा' में लोगों ने काफी तारीफ की। मसाबा और मैं लगातार खूब काम करते रहे हैं और अपने लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे थे। जैसे ही दो हफ्ते का समय खाली मिला, हमने बहुत ही सादगी से 27 जनवरी 2023 को कोर्ट में जाकर शादी कर ली। 

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