सतीश कौशिक
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किरदारों की खूबसूरती ये है
सतीश कौशिक को हिंदी सिनेमा के वे दिन बहुत सुनहरे लगते जब कहानियों का फोकस सिर्फ हीरो या हीरोइन पर नहीं होता था। एक मुलाकात में उन्होंने कहा था, ‘हिंदी फिल्मों में 70, 80 और 90 के दशक में जो खांचे बने होते थे, उन्हें भरने का काम हम करते थे। उस हिसाब से मैं मानता हूं कि मेरे किए वह सभी अभिनेताओं के ही किरदार रहे, न कि कॉमेडियन के। मैंने फिल्मों में जितने भी कॉमिक किरदार किए हैं, वह हमेशा किरदारों से जुड़े रहे। चाहे वह मेरा कैलेंडर का किरदार हो, उसके हावभाव और पारिवारिक विशेषताओं के चलते वह पूरा एक किरदार था। वह सिर्फ हंसाने के लिए कुछ नहीं करता था। 'साजन चले ससुराल' का मुथुस्वामी, 'बड़े मियां छोटे मियां' का शराफत अली, 'हसीना मान जाएगी' में मेरा संवाद, ‘आइए तो सही, बैठिए तो सही’, यह सभी किरदार अभिनय से ही जुड़े रहे।’