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अमेरिका जाने में मुश्किल बन सकता है मुंबई विस्फोट मामला, जानें वो पहली रिपोर्ट जिससे पता चला था संजय दत्त का अंडरवर्ल्ड कनेक्शन

Thu, 13 Aug 2020 05:13 PM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
अभिनेता संजय दत्त के कैंसर का पता चलने के बाद उनके फैंस के बीच शोक का माहौल है। हर कोई उनके जल्द ठीक होने की कमाना कर रहा है। संजय दत्त भी अपने इलाज के लिए अमेरिका जा सकते हैं, लेकिन उनके जाने पर एक पेंच अटक सकता है। यह पेंच 27 साल पुराने मुंबई बम ब्लास्ट मामले से जुड़ा है। हम आपको बताते हैं कि संजय दत्त का क्या था वह विवाद।
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
संजय दत्त का यह विवाद मुंबई बम ब्लास्ट से जुड़े एक मामले का था। जिस खबर से दुनिया को संजय दत्त के मुंबई धमाकों के कनेक्शन का पहली बार पता चला था वो खबर छपी थी 16 अप्रैल, 1993 को। ये खबर मुंबई के एक टैबलायड 'डेली' में छपी थी। पहले पन्ने पर छपी खबर का शीर्षक था- 'संजय हैज एके-56 गन'। ये खबर लिखी थी मुंबई के क्राइम रिपोर्टर बलजीत परमार ने, उस वक्त अखबार के संपादक हुआ करते थे रजत शर्मा। बलजीत परमार को ये खबर कहां से मिली, इसके बारे में उन्होंने बीबीसी हिंदी को बताया, "वो 12 अप्रैल का दिन था, मुंबई में बम धमाकों के एक महीने पूरे हुए थे, तो मैं माहिम पुलिस स्टेशन गया था। बम धमाकों के मामले की जांच चल रही थी और पुलिस से कुछ सुराग मिलने की उम्मीद थी। बाहर ही एक आईपीएस अधिकारी मिल गए, मैंने पूछा कि नया क्या पता चला है, उन्होंने कहा कि आपके ही सांसद के बेटे का नाम आ रहा है।"
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
बलजीत परमार ने अपना दिमाग़ दौड़ाना शुरू किया, लेकिन उन्हें किसी सांसद या फिर उनके बेटे का नाम नहीं सूझा हालांकि वे जिस इलाके में रह रहे थे वहां से तब सुनील दत्त सांसद हुआ करते थे। बलजीत कहते हैं, "दत्त साब की छवि ऐसी थी कि मैं उनके बारे में सोच भी नहीं रहा था। मैं उनको अच्छे से जानता भी था, उनकी पदयात्रा में मैं महाराष्ट्र में उनके साथ घूम चुका था, मेरे पंजाबी होने की वजह से उनसे एक तरह की आत्मीयता भी थी।" ऐसे में वो सांसद कौन है और उसका बेटा कौन हो सकता है, इसको जानने के लिए उसी रात उन्होंने माहिम पुलिस स्टेशन और मुंबई बम धमाके की जांच से जुड़े एक दूसरे पुलिस अधिकारी से बात की।

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फिल्म अभिनेता संजय दत्त - फोटो : amarujala
बलजीत परमार कहते हैं कि उन्होंने जानकारी पाने के लिए उस पुलिस अधिकारी के सामने एक तरह से ग़लत बयानी की थी। बलजीत परमार बताते हैं, "मैंने मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ अफसर से कहा कि आप लोगों ने सांसद के बेटे को उठा लिया है पूछताछ कर रहे हैं, तो उस पुलिस अधिकारी ने कहा कि अभी उठाया नहीं है, वो कहीं शूटिंग के लिए बाहर हैं, आने पर देखेंगे।" बलजीत ने जैसे ही शूटिंग सुना, उन्हें समझते देर नहीं लगी कि ये मामला सुनील दत्त से जुड़ा हो सकता है क्योंकि उस वक्त उनके बेटे संजय दत्त बॉलीवुड के सितारों में एक थे।
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
बलजीत को ये भी मालूम हो चुका था कि संजय दत्त 'आतिश' फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में मॉरीशस में थे। इसके बाद बलजीत परमार ने पूरी कहानी जुटा ली। पुलिस सूत्रों से उन्हें वो सब मालूम हो गया था कि जिस पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि किस तरह से संजय दत्त के पास एके-56 जैसे हथियार रखे गए थे। ये सारी बातें समीर हिंगोरा और यूसुफ नलवाला ने मुंबई पुलिस को बताई थीं। ये दोनों उस वक्त संजय दत्त की फिल्म 'सनम' के प्रोड्यूसर थे। इन दोनों से पूछताछ के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर अमरजीत सिंह समरा की प्रेस कांफ्रेंस में 12 अप्रैल को ही ये सवाल भी पूछा गया था कि क्या संजय दत्त की भी कोई भूमिका हो सकती है, उन्होंने तब इतना ही कहा था कि अभी जांच चल रही है। शक और कयास के दौर में बलजीत परमार को सटीक जानकारी मिल रही थी।
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
जगरनॉट पब्लिकेशन से इसी साल प्रकाशित हुई संजय दत्त की बायोग्राफी 'द क्रेजी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड बॉय' में भी बलजीत परमार और उनकी रिपोर्ट का जिक्र है। बायोग्राफर यासिर उस्मान ने लिखा है कि डेली टैबलायड के क्राइम रिपोर्टर बलजीत परमार को 14 अप्रैल को संजय दत्त ने मॉरीशस से फोन किया था। संजय दत्त के फोन करने की वजह के बारे में बलजीत बताते हैं, "मेरी स्टोरी पूरी तैयार हो गई थी, लेकिन ट्रेनिंग ऐसी थी कि जब आप किसी पर आरोप लगाते हैं तो उसका पक्ष भी शामिल करते हैं। मैंने 13 अप्रैल को दत्त साब के घर पर फोन किया, पता चला वे घर पर नहीं हैं। मैंने उनके एक बेहद नजदीकी शख्स से कहा कि मेरा दत्त साब से बात करना बेहद जरूरी है। मुझे ये पता चला कि दत्त साब जर्मनी गए हुए हैं, जर्मनी में उनके एक दोस्त होते थे जय उलाल। वे फोटोग्राफर थे, मैं उन्हें जानता था। मैंने उनके यहां फोन किया तो उन्होंने मुझे बताया कि दत्त साब लंदन के लिए निकल गए हैं।"
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संजय दत्त और सुनील दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
"मुझे ये लग रहा था कि दत्त साब बात करने में हिचक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आशंका थी कि ये स्टोरी किसी और को नहीं मिल जाए। ऐसे में 14 अप्रैल को सुबह आठ बजे के करीब संजय दत्त का फोन घर के लैंडलाइन पर आया, मोबाइल का जमाना था नहीं।" "संजय ने मुझसे पूछा कि आप कुछ इन्क्वायरी कर रहे हो, दत्त साब तो बाहर हैं, क्या बात है? मैंने उन्हें बताया कि समीर हिंगोरा और यूसुफ नलवाला ने पुलिस के सामने सब कुछ बता दिया है कि किस तरह से आपको एके-56 और हैंड ग्रेनेड पहुंचाया गया था। अब पुलिस का शिकंजा आप पर कसने वाला है। संजय ने कहा- ऐसा नहीं हो सकता।" हालांकि कुछ घंटों के बाद लैंडलाइन के फोन पर संजय दत्त फिर से बलजीत से बात कर रहे थे। इस बातचीत के बारे में बलजीत बताते हैं, "संजय ने पहले तो कहा कि आपके पास ग़लत खबर है, आप ब्लैकमेल कर रहे हो लेकिन मैंने कहा कि जिन लोगों ने आपको हथियार दिया है, उन लोगों ने पुलिस के सामने आपका नाम ले लिया है, मैं क्या ब्लैकमेल करूंगा आपको।"

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संजय दत्त - फोटो : instagram
"फिर उन्होंने पूछा कि अब क्या हो सकता है, मैंने उनसे कहा कि अगर हथियार पास में हैं तो आप सरेंडर कर दो, हथियार के साथ, किसी स्टाफ से पुलिस के पास हथियार जमा करवा दो, आत्मसमर्पण करने पर आपके साथ रियायत हो सकती है लेकिन अगर पुलिस ने आपके घर से हथियार पकड़ लिया तो फिर आप टाडा में लंबा फंस जाओगे। " बलजीत ने 15 अप्रैल को मुंबई कमिश्नर समरा को संजय दत्त से हुई बातचीत का ब्योरा दिया, तो समरा ने उनसे कहा कि संजय दत्त से उनकी भी बातचीत हुई और वो जांच में सहयोग देने की बात कह रहे हैं। इतनी मशक्कत के बाद 15 अप्रैल को बलजीत परमार ने वो स्टोरी लिखी, जो उनके अखबार में लीड रिपोर्ट के तौर पर छपी, 'संजय दत्त हैज एके-56 गन'। इसमें उन्होंने उन सारी बातों का ब्यौरा लिख दिया। इस खबर से सनसनी मचनी ही थी। पूरी दुनिया को मालूम चल चुका था कि संजय दत्त के रिश्ते मुंबई में धमाका करने वालों से रहे हैं। बलजीत कहते हैं, "दत्त साब की ओर से राम जेठमलानी ने एक करोड़ का नोटिस भेज दिया था। दूसरे अखबारों ने लिखा कि ये रिपोर्ट ग़लत है। लेकिन मुंबई पुलिस कमिश्नर ने इस खबर पर नो कमेंट कहा।" संजय दत्त मॉरीशस से 19 अप्रैल को लौटे। वो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे और मुंबई पुलिस ने उन्हें वहीं से हिरासत में लिया।
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, संजय दत्त ने बलजीत की सलाह पर अमल नहीं किया था, उन्होंने अपने दोस्तों के जरिए हथियार नष्ट करने की कोशिश की। संजय दत्त की बायोग्राफी में यासिर उस्मान ने संजय दत्त के हवाले से लिखा है, "मैंने अपने दोस्त यूसुफ नलवाला को 14 अप्रैल को फोन किया था, उससे अपने रूम में रखे हथियार को नष्ट करने को कहा था।" यूसुफ नलवाला ने पुलिस को बताया था कि कैसे उसने संजय के कमरे से एके-56 लेकर उसे टुकड़ों में काटकर अपने एक स्टील कारोबारी दोस्त के यहां गलाने का प्रयास किया था। संभवत संजय दत्त उस दौर में अपने अपराध की गंभीरता को समझ नहीं पाए थे। बलजीत परमार कहते हैं, "दुनिया को लगता है कि मेरी खबर के चलते संजय दत्त गिरफ्तार हुए, जबकि ऐसा नहीं है। मेरी खबर नहीं भी छपती तो भी संजय दत्त गिरफ्तार होते, क्योंकि उन्हें हथियार पहुंचाने वालों ने पुलिस के सामने सब कुछ उगल दिया था।" हालांकि बलजीत परमार की स्टोरी ब्रेक होने के बाद मुंबई पुलिस के लिए इस हाई प्रोफाइल केस में कार्रवाई करने के लिए दबाव जरूर बढ़ गया था, जो संजय दत्त के रसूख से कहीं ज्यादा बड़ा साबित हुआ। बलजीत परमार कहते हैं, "16 अप्रैल की उस स्टोरी के बाद दत्त साब ने कभी मुझसे बात नहीं की, संजय दत्त ने भी नहीं की।"

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