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अमर उजाला से EXCLUSIVE बातचीत में बोले सलमान खान, मुझे ‘भाई’ शब्द को फिर से इज्जत बख्शनी है

Sat, 18 Jan 2020 11:59 AM IST
शिप्रा सक्सेना पंकज शुक्ल, मुंबई
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Salman Khan - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
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54 साल के हो चुके सलमान खान ने बतौर हीरो हिंदी सिनेमा को 30 साल दिए हैं। लेकिन, उनका प्रशिक्षण इससे कहीं लंबा है। अपने पिता को वह अपनी हर कामयाबी का श्रेय देते हैं और सबसे मुश्किल काम इंटरव्यू देना मानते हैं। सलमान की अगली फिल्म 'राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई' के सेट पर अमर उजाला के लिए पंकज शुक्ल ने की सलमान खान से ये खास मुलाकात।
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Dabangg 3 - फोटो : Social Media
आपने दबंग शब्द को एक नए मायने दिए और अब मोस्ट वांटेड भाईभाई मोस्ट वांटेड कैसे हो सकता है?
मैं हूं मोस्ट वांटेड भाई। क्या है कि पहले भाई को भाईगिरी में लिया जाता था, उसके पहले भाई बहुत ही इज्जत देने वाल शब्द रहा है। लेकिन एकाएक इसका अभिप्राय काफी नकारात्मक हो गया है। इतना सम्मान देने वाले शब्द ने अपने मायने खो दिए बस उसी शब्द को फिर से इज्जत बख्शनी है, उसे एक सकारात्मक ध्वनि प्रदान करनी है। दबंग फ्रेचांइजी से दबंग शब्द का संकेतार्थ ठीक हुआ, राधे से भाई शब्द का करना है।

 
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Salim Khan and Salman Khan - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
सिनेमा में निर्देशक के हिसाब से चलने वाले अभिनेता तो खूब हुए हैं, आपने अभिनेता के हिसाब के निर्देशक का चलन शुरू कर दिया?
क्योंकि हमारी पृष्ठभूमि लेखन की है। हमारे पिता सलीम खान आज भी देश के सबसे अच्छे लेखक हैं। सिनेमा हमने बचपन से सीखा है। वह जब कहानियां सुनाते थे तो हम वहां बैठा करते थे। हमने ये समझा है कि कहानी में क्या सही है, क्या गलत है। हमने उनकी फिल्में देखी हैं और समझा है कि पारिवारिक फिल्में क्या होती हैं। उनका विलेन भी बलात्कारी कभी नहीं रहा। आप गब्बर सिंह को देख लो। वह छिछोरा किरदार नहीं है। साफ सुथरी फिल्म बनाने का सबक हमने उन्हीं से सीखा।

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Salman Khan - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
और, सलीम-जावेद के दौर से अब तक एक्शन कितना बदला है हिंदी सिनेमा में?
हम अब भी परदे पर 10-15 लोगों को मारते हैं। हां, एक्शन की तकनीक बदली है। तमाम चीजें आ गई हैं। लेकिन चोट अब भी लगती है। शूटिंग करने के बाद पसलियां अब भी दर्द करती हैं। चोट लगे घुटने दुखते हैं। लेकिन, हिंदी सिनेमा का हर हीरो सुपरहीरो है। हॉलीवुड में स्पाइडरमैन, बैटमैन है लेकिन हमारे फैंस को अब भी हमारा एक्शन अच्छा लगता है। वहां सिनेमा हकीकत के करीब ले जाने की कोशिश होती है तो 10-15 लोगों को मारने के लिए फिर कोई सुपरपॉवर वाला हीरो चाहिए होता है उनको। यहां हम ही काफी हैं।
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Salman Khan - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
टेलीविजन, फिल्म और भी न जाने कितना काम करते हम आपको देखते हैं, इतना काम करते हैं तो सबसे मुश्किल क्या लगता है?
सबसे मुश्किल काम है इंटरव्यू देना। आपके लिए नहीं कह रहा। लेकिन, हम कुछ बोलें, सुनने वाला कुछ समझे, उसका संपादक समझाए कि इसको इस तरह से नहीं उस तरह से लिखो ताकि सलमान ने जो कहा उसका मतलब कुछ और निकले। किसी तरह कोई विवाद खड़ा हो जाए तो ये बहुत मुश्किल लगता है। मैं आपके साथ सहज रूप से इसलिए बात कर रहा हूं कि आपको बरसों से जानता हूं। मेरा यही कहना है कि हमें बातों के मायने अलग नहीं देना चाहिए। जिस उद्देश्य से जो बात कही गई, उसे उसी हिसाब से लिखा जाना चाहिए।
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salman khan - फोटो : social media
54 साल की उम्र में आपकी चुस्ती फुर्ती अनुकरणीय है, क्या जरूरी है इसके लिए?
लोग समझते हैं कि जिम जाने से इंसान फिट रहता है। जिम तो हर कोई जाता है। लेकिन जिम के बाहर आपका जीवन कैसा है, वह बहुत मायने रखता है। जिम के बाहर खुद को संभाले रखना बहुत जरूरी है। आपके विचारों का सेहत पर सीधा असर होता है। आप जैसा सोचते हैं, वैसे ही आपका स्वास्थ्य रहता है।
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salman khan - फोटो : social media
आपकी फिल्में देखकर लोग निकलते हैं तो आपके जैसा बनना चाहते हैं, आपको भी कभी कोई फिल्म देखकर उसके हीरो जैसा बनने का मन हुआ तो होगा?
मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि मैं कॉमेडी फिल्में क्यों नहीं कर रहा हूं तो इन दिनों जो मैं फिल्में कर रहा हूं उनमें एक्शन है, प्यार है और कॉमेडी भी आ ही जा रही है। ये लार्जर दैन लाइफ फिल्में मेरे जीवन में अब आ गई हैं तो इसी में सब कुछ है। आप पूरे भारत में कहीं चले जाओ, सबको नायक चाहिए। हम बचपन में ब्रूस ली की फिल्में देखते थे और सोचते थे कि ब्रूस ली बनना है। तो भारत में सिनेमा तभी तक है जब तक कि दर्शक के मन में हीरो जैसा बनने की लालसा है। ये खत्म तो सिनेमा भी खत्म।

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salman khan - फोटो : Social Media
पहले से बेहतर इंसान बनने के लिए क्या करते हैं?
गलतियां सबसे हो जाती हैं। मेरा मानना है कि गलती कभी इरादतन नहीं होनी चाहिए। गलती होते ही पता चल जाता है कि गलती हो गई। तो मैं अपने जन्मदिन या नए साल का इंतजार क्यों करूं उसे सुधारने के लिए, नए साल के नियम बनाने के लिए। जहां भी लगे कि ये गलती हो गई, उसमें वहीं से सुधार कर लेना चाहिए। लेकिन, अगर आपको पता है कि ये गलत है और उसके बाद भी किए जा रहे हैं, तो ये ठीक नहीं है। बिग बॉस से मुझे हर सीजन कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इसी ने मुझे सिखाया कि किसी बात को लेकर कैसी प्रतिक्रिया देनी है और कैसी प्रतिक्रिया नहीं देनी है या फिर कब किसी बात को लेकर प्रतिक्रिया देनी है और कब नहीं।

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