'ग़जनी' के प्रमोशन के लिए आमिर ख़ान सैलून में जाकर हज्जाम का रोल निभा रहे थे। आप भूले नहीं होंगे। दर्शक सिनेमाहॉल तक चले आएं, इसके लिए नए-नए तरक़ीब आजमाए जा रहे हैं, जिसे आज कल फ़िल्म प्रोमोशन और फ़िल्म मार्केटिंग का नाम दिया जाता है।
फ़िल्म मार्केटिंग की अहमियत का जिक्र करते हुए टी-सीरीज़ के ग्लोबल मार्केटिंग प्रेसिडेंट और सह-निर्माता विनोद भानुशाली कहते हैं, "भारत में लोग फ़िल्म बहुत देखते हैं लेकिन हमारे देश में थिएटर में पैसे खर्च करके फ़िल्म देखने वालो की संख्या चार करोड़ से भी कम है और देश भर में तकरीबन साढ़े आठ हज़ार स्क्रीन हैं। इन दर्शकों को थिएटर तक लाना हमारा लक्ष्य होता है क्योंकि फ़िल्म की असल कमाई यहीं से आती है।"