सैफ अली खान
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सैफ अली खान के एक्टिंग करियर में वक्त के साथ आए बदलाव
रोमांटिक हीरो बनकर की शुरुआत: सैफ अली खान ने साल 1993 में फिल्म ‘परंपरा’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। सैफ को बेस्ट मेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड तक मिला। रोमांटिक हीरो के तौर पर वह ‘आशिक आवारा’ में भी दिखे।लेकिन इन किरदारों में वह दर्शकों पर गहरा असर नहीं छोड़ सके।
आगे चलकर सपोर्टिंग रोल में दिखे: जब सैफ अली खान को रोमांटिक फिल्मों में सफलता नहीं मिली तो वह सेकेंड हीरो, सपोर्टिंग रोल करने लगे। अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ में अभिनय करते नजर आए। इस फिल्म में बॉक्स ऑफि पर जमकर कमाई की और सैफ के करियर ग्राफ को भी नीचे जाने से बचा लिया। आगे भी वह ‘कच्चे धागे’, ‘हम साथ साथ हैं’, ‘क्या कहना’, ‘दिल चाहता है’ और ‘कल हो ना हो’ जैसी चर्चित फिल्मों में सपोर्टिंग एक्टर के रोल में ही नजर आए। इसी के साथ वह ‘परिणीता’ और ‘हम तुम’ जैसी रोमांटिक फिल्मों का भी हिस्सा बने।
नेगेटिव रोल में छा गए सैफ अली खान: साल 2004 में सैफ अली खान ने ‘एक हसीना थी’ जैसी फिल्म की, इसमें एक ग्रे शेड रोल किया। फिर आया साल 2006, इस साल सैफ अली खान विशाल भारद्वाज निर्देशित फिल्म ‘ओमकारा’ में लगड़ा त्यागी के नेगेटिव रोल में दिखे। इस किरदार में सैफ अली खान को देखकर दर्शक, क्रिटिक्स सभी हैरान रह गए। फिर ‘रेस’ में भी उन्होंने ग्रे शेड रोल किया। फिल्म ‘ताण्हा जी’, ‘देवरा’ और ‘आदिपुरुष’ जैसी फिल्मों में भी वह विलेन के रोल में नजर आए। नेगेटिव किरदारों में ही सैफ अली खान ने दर्शकों को सबसे ज्यादा इंप्रेस किया है।