सई मांजरेकर
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अपनी बात जारी रखते हुए सई कहती हैं, 'मैं बहुत दुविधा में थी। यह सब मेरी समझ से बाहर था। लेकिन, जब मैं बड़ी हुई तब मुझे ठीक तरह से समझ में आया। लेकिन, जब मुझे इसी दुर्घटना पर बन रहे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने का मौका मिला तो मुझे उन हमलों के बारे में और भी ज्यादा गहराई से पता चला। मैं कमांडो संदीप उन्नीकृष्णन का दिल से सम्मान करती हूं। मुझे लगता है कि उनकी यह कहानी लोगों तक पहुंचनी ही चाहिए। वह इसके हकदार हैं। और, मैं अपनी तरफ से इस प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने की पूरी कोशिश करूंगी।'