Sai Paranjpye
परांजपे बरसों बाद एनएसडी आकर बेहद उत्साहित दिखीं। उन्होंने बताया कि ‘यही वह जगह है जहां से मैंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में तत्कालीन डायरेक्टर इब्राहिम अलकाजी की देखरेख में एक्टिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और डायरेक्शन के गुर सीखे।
मुझे कभी भी एक्टिंग में ज्यादा रुचि नहीं थी, मैं डायरेक्शन और स्क्रिप्ट राइटिंग में ही रुचि रखती थी, लेकिन उन्होने मुझे प्रेरित किया और एक रिफाइन्ड व्यक्तित्व हासिल करने में मेरी मदद की।‘
पद्म भूषण से सम्मानित परांजपे ने सालों तक मराठी, हिंदी और अंग्रेजी नाटकों का लेखन और निर्देशन किया है। व्यावसायिक सिनेमा से कुछ अलग हटकर उन्होंने जो 6 फिल्में बनाईं, उनको देश विदेश में बहुत सराहा गया और उन्हें एक आम आदमी का फिल्मकार कहा गया।
बच्चों के लिए लिखी गई उनकी पुस्तकों को कई पुरस्कार मिले। वहीं उनकी पहली फीचर फिल्म ‘स्पर्श’ ने पांच पुरस्कार जीते, जिसमें नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी शामिल है। स्पर्श के बाद कॉमेडी ‘चश्मे बद्दूर’ और ‘कथा’ आई। व्यावसायिक और समानांतर सिनेमा के बीच एक सामंजस्य बिठाते हुए परांजपे ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।