साहिर लुधियानवी
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लाहौर के बाद साहिर कुछ समय दिल्ली रहे। उसके बाद मुंबई आ गए। फिल्म 'आजादी की राह' पर (1949) के लिए उन्होंने पहली बार गीत लिखे। फिल्म 'नौजवान' का गाना ठंडी हवायें लहरा के आयें ..... बहुत लोकप्रिय हुआ। बाद में साहिर लुधियानवी ने 'बाजी', 'प्यासा', 'फिर सुबह होगी', 'कभी कभी' जैसी लोकप्रिय फिल्मों के लिए गाने लिखे। सचिनदेव बर्मन के अलावा एन. दत्ता, शंकर जयकिशन, खय्याम आदि संगीतकारों ने उनके गीतों की धुनें बनाई हैं। साहिर ने फिल्मों के लिए भी जो गाने लिखे, उनमें उनका खुद का व्यक्तित्व भी झलकता है। साहिर ऐसे पहले गीतकार थे, जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी। उनके प्रयास के बावजूद ही संभव हो पाया कि आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय गायक तथा संगीतकार के अतिरिक्त गीतकारों का भी उल्लेख किया जाता था। इससे पहले तक सिर्फ गायक-संगीतकार का नाम ही होता था।
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