पढ़कर सीखना तो खैर पूरे जीवन चलता ही रहता है लेकिन हां, घूमा भी मैंने बहुत है। बचपन में ही अपने पिता के साथ मैं संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, ओमान जैसे देश घूमती रही।
कालजयी फिल्म ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ के लेखन में अपने अनूठे सिनेमा की पहली आवाज पाने वाली निर्देशक रुचि नारायण अब अपनी अगली फिल्म की तैयारी में हैं। वेब सीरीज ‘हंड्रेड’ और ‘कर्मा कॉलिंग’ की लोकप्रियता ने उनको युवाओं की पसंद समझने का एक नया नजरिया भी दिया है। रुचि नारायण ने हिंदी सिनेमा में अपनी राह अपनी मेहनत, जिद और अपनी काबिलियत से तो बनाई ही है, इस सफर में उन्हें चंद बेहद काबिल दोस्तों का भी साथ मिला है। उनकी कंपनी रैट फिल्म्स के आर ए टी का मतलब क्या है, और क्या है उनका रिश्ता अपनी सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ की हीरोइन रवीना टंडन से, बता रही हैं रुचि ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल को इस एक्सक्लूसिव मुलाकात में..
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लारा दत्ता और रुचि नारायण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके सिनेमा में दुनिया जहान की तमाम बातें बहुत ही खूबसूरती से लेकिन सहजता से बयां हो जाती हैं, इसके लिए आपने खूब पढ़ा है या फिर खूब घूमा है?
पढ़कर सीखना तो खैर पूरे जीवन चलता ही रहता है लेकिन हां, घूमा भी मैंने बहुत है। बचपन में ही अपने पिता के साथ मैं संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, ओमान जैसे देश घूमती रही। दिल्ली की पैदाइश है। कोलकाता में शुरुआती दिन बीते और मसूरी व कतर में पढ़ाई की। अब मुंबई में हूं तो कह सकते हैं कि घुमक्कड़ी ने मुझे वह बनाया है, जो आज मैं हूं।
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रुचि नारायण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दिल्ली तो खैर वहां साल दो-साल भी रह लेने वालों के दिल से जाता ही नहीं है..
आप यकीन करेंगे कि हमारा परिवार पुरानी दिल्ली के उन परिवारों में शामिल हैं जिनके पुरखों ने दिल्ली शहर बसाया है। लेकिन, मेरा मानना है कि इंसान जितना ज्यादा घूमता है, जितना ज्यादा पढ़ता है, उसका लेखन और निर्देशन उतना ही परिपक्व होता जाता है।
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रुचि नारायण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इसमें अपने पुराने उस्ताद निर्देशक सुधीर मिश्रा की कितनी मदद मानती हैं आप?
सुधीर जी, मेरे ही नहीं मेरी पीढ़ी के दर्जनों युवाओं के उस्ताद रहे हैं। वह जिंदगी को बेफिक्री में गुजारने में यकीन रखते हैं। उनकी फिल्म ‘इस रात की सुबह नहीं’ पर मैं एक बच्ची की तरफ फुदकती रहती थी। ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ की लेखन टीम में उन्होंने ही शामिल किया। ये फिल्म मेरा वह रनवे, जिससे मेरे करियर ने पहली बिना हिचकोले खाए उड़ान भरी।
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हनुमान दा दमदार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इन दिनों आपकी फिल्म ‘हनुमान दा दमदार’ फिर से चर्चा में हैं, इसकी वजह?
मुझे पूरा तो पता नहीं लेकिन शायद हालिया रिलीज फिल्म ‘हनुमान’ की वजह से लोग मेरी फिल्म फिर से देख रहे हैं और उसमें नई नई बातें तलाश रहे हैं, मुझे भी बता रहे हैं। ये एक एनीमेशन फिल्म थी, जिसमें फिल्म जगत के तमाम बड़े सितारों मसलन सलमान खान, रवीना टंडन, जावेद अख्तर, सौरभ शुक्ला और मकरंद देशपांडे जैसे लोगों ने अपनी आवाजें दी। मेरा मानना है कि हमारे आसपास जो कहानियां हैं, उन्हें अगर हम मौजूदा पीढ़ी के हिसाब से बना पाएं तो हमें इनकी प्रेरणा लेने के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है।
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कर्मा कॉलिंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेकिन, आपकी हालिया सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ तो एक अंग्रेजी सीरीज की ही रीमेक है?
ये सीरीज मेरे कर्मों की वजह से ही शायद बीते 10 साल में बार बार मुझ तक आती रही। जब मैंने ये सीरीज पहली बार देखी थी, तभी से इसकी कहानी मुझे भा गई थी। पहले इसे हम धारावाहिक के रूप में लाइफ ओके चैनल के लिए बनाना चाहते थे। फिर, इसके अधिकार डिज्नी के पास आ गए और विचार मेरा पहले से स्टार के पास था और स्टार भी फिर डिज्नी के पास ही आ गया। तो, कह सकते हैं ये सीरीज मेरे कर्म में ही लिखी थी।
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गिल्टी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस बीच आपने एक बेहद विचारोत्तेजक फिल्म ‘गिल्टी’ भी निर्देशित की?
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि फिल्म ‘गिल्टी’ सिर्फ मेरे और इसके निर्माता करण जौहर के सिर्फ एक फोन कॉल पर बनी फिल्म है। ये कहानी मैं पहले करण को सुना चुकी थी। फिर उन दिनों मीटू का शोर मचा और मेरे मन में इस कहानी को नया नजरिया देने की बात आई। बस, मैंने करण जौहर को फोन किया और उन्होंने फोन पर ही मुझे ये फिल्म बनाने की मंजूरी दे दी।
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आशुतोष शाह, रुचि नारायण, रवीना टंडन और ताहेर शब्बीर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ में रवीना टंडन को आपने जिस रूप, रंग और लावण्य के साथ प्रस्तुत किया है, वैसा उनकी वापसी पर कोई दूसरा निर्देशक पहले क्यों नही कर पाया?
रवीना को मैंने निर्देशित भले इस सीरीज मे किया हो, लेकिन वह मेरी दोस्त पहले है। हम एक दूसरे को बरसों से जानते हैं। इस कहानी को लेकर पहले भी हमारी चर्चाएं हो चुकी हैं। रवीना और मैंने बहुत सारा अच्छा, बुरा वक्त साथ गुजारा है। मेरा मानना है कि परदे पर किसी कलाकार का बेहतरीन दिखाने के लिए निर्देशक का उसके साथ साम्य होना बहुत जरूरी है।
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रुचि नारायण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अब आगे..?
अभी तो हम वेब सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ के दूसरे सीजन पर काम शुरू कर चुके हैं। हमारी कंपनी रैट (रुचि नारायण, आशुतोष शाह, ताहेर शब्बीर) फिल्म्स खूब विज्ञापन फिल्में और वृत्त चित्र भी बनाती रहती है। और, भी बहुत सारा काम है जिसका फिल्मों से सीधा कोई ताल्लुक नहीं है। वेब सीरीज और फिल्में बनाना हमारी कंपनी का सिर्फ एक पहलू है।
मेरा सवाल आपके निर्देशन में बनने वाली अगली फिल्म को लेकर था..
मैंने ये अभी तक कहीं साझा नहीं किया है। आपको पहली बार ये बता रही हूं। हां, मैं इन दिनों एक फिल्म पर काम कर रही हूं। विषय इसका दो अलग अलग कालखंडों का है और इसकी कहानी अब तक जितनी मैंने लिखी है, वह बहुत ही रोचक है। जिन एक दो सुपरसितारों से मैंने इसका विचार साझा किया, उन्हें ये कहानी बहुत पसंद भी आई है।