पुष्पा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
और, इन दिनों आपका जोर डांस नंबर से ज्यादा ऐसी धुनें बनाने पर दिख रहा है, जिन्हें आम दर्शक भी गुनगुना सके, ये बदलाव ‘श्रीवल्ली’ से आया?
नहीं, ऐसा तो नहीं है, मेरे गानों की मेलोडी साउथ में तो काफी पहले से लोग पसंद करते रहे हैं, हां फिल्म ‘पुष्पा द राइज’ के जिस गाने की आप बात कर रहे हैं, उसने हिंदी सिनेमा के दर्शकों और हिंदी संगीत के सुधी श्रोताओं को मेरे बारे में और जानने के लिए उत्साहित किया। मेरा अपना मानना है कि हिंदी सिनेमा का वही संगीत कालजयी रहा है जिसमें संगीत का रस माधुर्य जिसे हम अंग्रेजी में मेलोडी कहते, वह रहा है। मेलोडियस गाने यानी कि मधुर संगीत ही जीवन का उत्साह है, जीवन का रस है और जीवन का रंग है। ‘तेरी झलक अशर्फी’ मेलोडियस म्यूजिक का वह नया सिगनल है, जिसे पकड़कर मुझे हिंदी सिनेमा के दर्शकों और हिंदी सिने संगीत के श्रोताओं से संवाद करना है।