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‘मुल्क’ से लेकर ‘जय भीम’ तक, संविधान का महत्व समझाती कहानियां; भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर देखिए ये फिल्में

Mon, 26 Jan 2026 01:25 PM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Republic Day Special: इस साेमवार हर देशवासी अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। यह दिन हमें संविधान की अहमियत समझाता है। संविधान हर भारतीय नागरिक के जीवन को कैसे सशक्त बनाता है। हमें हमारे अधिकारों से संविधान परिचित करवाता है। कई फिल्मों ने भी संविधान की अहमियत, उसका मतलब आम नागरिकों समझाया है। 26 जनवरी के मौके पर आप ऐसी ही कुछ चर्चित फिल्मों को देख सकते हैं।
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संविधान की अहमियत बताने वाली फिल्में - फोटो : अमर उजाला

संविधान किसी देश का प्राण है, उसकी आत्मा है। कोई देश संविधान के कारण ही सुचारू रूप से चल पाता है। संविधान ही हर नागिरक के जीवन को बेहतर बनाने की राह बनाता है। भारतीय गणतंत्र दिवस हर साल यही बातें हमें याद दिलाता है। इस सोमवार हम सभी अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। इस अवसर पर आप ऐसी कुछ चर्चित फिल्में भी देख सकते हैं, जो संविधान का महत्व समझाती हैं। कैसे संविधान से एक नागरिक का जीवन बदलता है, उसकी झलक इन फिल्मों की कहानियों में नजर आती है।

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फिल्म- मुल्क - फोटो : इंस्टाग्राम-@anubhavsinhaa

मुल्क
ऋषि कपूर स्टारर की फिल्म 'मुल्क' 2019 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में एक अल्पसंख्यक परिवार की कहानी थी, सामाजिक भेदभाव, उत्पीड़न का शिकार होता है। ऐसे में यह परिवार कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है।
इस परिवार की बहू जो पेशे से वकील है, संविधान के आर्टिकल 15 के तहत अपने हक के लिए केस लड़ती है। संविधान का आर्टिकल 15 राज्य में धर्म, जाति, धर्म, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर नागरिकों के बीच भेदभाव को रोकता है। इस फिल्म को अनुभव सिन्हा ने निर्देशित किया था। 

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फिल्म आर्टिकल 15 - फोटो : एक्स (ट्विटर)

आर्टिकल 15
अनुभव सिन्हा ने ही एक और फिल्म 'आर्टिकल 15' भी बनाई थी। यह फिल्म भी आम नागरिक को उसे हक के बारे में जागरुक करती है। इस फिल्म में लीड रोल में आयुषमान खुराना थे। फिल्म की कहानी दो ऐसी लड़कियों के इर्द-गिर्द बुनी गई जिनका अपहरण हो जाता है।
इस केस के लिए जब आयुषमान खुराना पुलिस ऑफिसर बनकर जांच करते हैं तो मामला 'आर्टिकल 15' के हनन का निकलता है। फिल्म में मनोज पहवा, कुमुद मिश्रा, ईशा तलवार और सयानी गुप्ता जैसे उम्दा कलाकार नजर आए।

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फिल्म जय भीम - फोटो : सोशल मीडिया

जय भीम
साल 2021 में रिलीज हुई फिल्म 'जय भीम' में भी सामाजिक भेदभाव की कहानी थी। यह तमिल लीगल ड्रामा फिल्म 1993 में हुई एक असल घटना पर आधारित थी। 'जय भीम' को एक्टर सूर्या और एक्ट्रेस ज्योतिका ने प्रोडयूस किया था।
फिल्म में एडवोकेट चंद्रू का किरदार सूर्या ने निभाया था, वह इरुलर कबीले के हकों के लिए कानून का दरवाजा खटखटाते हैं। यह फिल्म संविधान के 'आर्टिकल 17' का महत्व बताती हैं। संविधान के इस अनुच्छेद के अनुसार छुआछूत गैरकानूनी है। किसी नागरिक के साथ ऐसा भेदभाव नहीं किया जा सकता है। 

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फिल्म न्यूटन - फोटो : सोशल मीडिया

न्यूटन 
साल 2017 में रिलीज हुई राजकुमार राव स्टारर फिल्म 'न्यूटन' की कहानी भी नागरिकों वोट देने के उनके मौलिक अधिकारों से अवगत कराती है। संविधान हर नागरिक को वोट देने का अधिकार देता है।
इस फिल्म की कहानी में राजकुमार राव एक सरकारी कर्मचारी है, जिसे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में वोटिंग करवाने की जिम्मेदारी मिलती है। इस असुरक्षित माहौल के बीच भी वो आम नागरिकों को वोटिंग का महत्व समझाता है। वोटिंग प्रोसेस को पूरा करवाता है। अमित वी मसुरकर ने इस फिल्म का डायरेक्शन किया था।

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आरक्षण - फोटो : एक्स (ट्विटर)

आरक्षण 
फिल्म ‘आरक्षण’ का निर्देशन प्रकाश झा ने किया था। इस फिल्म में संविधान के आर्टिकल 16 का महत्व समझाया गया है। यह आर्टिकल आम नागरिकों को सरकारी नौकरी में समान अवसर देता है। इसमें धर्म, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान या निवास के आधार पर भेदभाव को रोका जाता है। फिल्म में अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण लीड रोल में थे। 

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आर्टिकल 370 - फोटो : एक्स (ट्विटर)
आर्टिकल 370
फिल्म 'आर्टिकल 370' का निर्देशन आदित्य सुहास जंभाले ने किया था। 'आर्टिकल 370' को आदित्य धर ने लिखा था। इस फिल्म में यामी गौतम ने इंटेलीजेंस ऑफिसर जूनी हक्सर का किरदार निभाया है। कहानी जम्मू-कश्मीर में 'आर्टिकल 370' के खत्म होने के दौरान फैली हिंसा और आतंकी गतिविधियों की रोकथाम पर है। 

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