फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला EXCLUSIVE: मेरे हीरो बनकर शत्रुघ्न को मिली नई राह, बस, एक ही अरमान अधूरा रह गया

Sat, 07 Jan 2023 09:16 AM IST
पलक शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो मुंबई
विज्ञापन
1 of 10
रीना रॉय - फोटो : Social media
रीना रॉय के माता-पिता सादिक अली और शारदा राय ने उन्हें अभिनय घुट्टी में पिलाया। दोनों हिंदी सिनेमा के हाशिये पर रहे कलाकार थे। और, फिर एक दौर ऐसा भी आया जब रीना रॉय हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी अभिनेत्री बनीं। 70 और 80 के दशक की दमकती सुपरस्टार रीना रॉय ने ये एक्सक्लूसिव बातचीत अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या पर की।
विज्ञापन

2 of 10
रीना रॉय - फोटो : सोशल मीडिया
आपने बहुत कम उम्र में अभिनय शुरू कर दिया, क्या वाकई जरूरत’ ही आपकी पहली फिल्म है? निर्माता निर्देशक बी आर इशारा की फिल्म 'नई दुनिया नए लोग' मेरी पहली फिल्म थी। हां, रिलीज पहले हुई 'जरूरत'। 'नई दुनिया नए लोग' में जब मैंने एक छोटी सी स्कूल गर्ल का किरदार किया तब मैं 13 साल की थी। यह फिल्म निर्माताओं के आपसी झगड़े की वजह से रिलीज नहीं हो पाई। इसके छह महीने बाद जब बी आर इशारा 'जरूरत' बनाने जा रहे थे तो उसमें भी पहली पसंद रेहाना सुल्तान ही थीं लेकिन 'चेतना' के बाद रेहाना बहुत व्यस्त हो गई थी तो मुझे ये मौका मिला। यह फिल्म 1972 में रिलीज हुई थी।
विज्ञापन

3 of 10
रीना रॉय - फोटो : सोशल मीडिया

50 साल हो गए आपको मनोरंजन जगत में काम करते हुए लेकिन आपक राह कामयाबी की तरफ मोड़ देने वाली फिल्में जैसे को तैसा’ और ‘नागिन’ को लोग अब तक नहीं भूले...
'जैसे को तैसा' 1973 में रिलीज हुई। इसके हीरो जितेन्द्र बहुत ही मेहनती और समय के पाबंद इंसान रहे हैं। लोग अब फिटनेस के चक्कर में खाने पीने पर इतना ध्यान देते हैं, वह 50 साल पहले हमें समझाया करते थे कि मीठा मत खाओ, रोटी चावल मत खाओ, सिर्फ प्रोटीन वाली चीजें और सलाद खाओ। खूब वर्जिश करो। मैं तो थी 15 साल की तो मुझे उनकी बातें समझ ही नहीं आती थीं लेकिन मैंने कभी जितेंद्र को रोटी, चावल खाते नहीं देखा। रही बात ‘नागिन’ की तो उस दौर में राजकुमार कोहली ही ऐसे निर्देशक थे जो इतने सारे सितारों को एक साथ इकट्ठा कर सकते थे। इस काम में उनकी पत्नी निशि की भी बहुत मेहनत शामिल थी। 'नागिन' के बाद मैंने उनके साथ 'जानी दुश्मन' और 'राज तिलक' भी कीं। कोहली साब के बाद मनमोहन देसाई ही ऐसा कर पाए।

4 of 10
कालीचरण - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
और, फिर आई कालीचरण’! शत्रुघ्न सिन्हा के साथ तो आपकी जोड़ी खूब जमी? फिल्म ‘कालीचरण’ के निर्देशक सुभाष घई के साथ मैं उनकी हीरोइन के तौर पर एक फिल्म 'गुमराह' कर चुकी थी। उसमें वह अभिनेता थे। उनके साथ एक अलग ही रिश्ता था मेरा। फिर जब वह निर्देशक बने तो उनकी फिल्म 'कालीचरण' और ‘विश्वनाथ’ में मैंने काम किया। शत्रुघ्न सिन्हा के साथ मैंने बहुत सारी फिल्में की और सारी फिल्मों को बहुत पसंद किया गया। तो ये तो सच है कि उनके साथ मेरी जोड़ी खूब जमी। पहली बार वह 'कालीचरण' में मेरे ही हीरो बनकर आए और इसी फिल्म से उनका दौर बदला। नहीं तो पहले तो वह फिल्मों में विलेन के ही किरदार निभाते थे। मेरी फिल्म 'मिलाप' में भी वह विलेन थे लेकिन 'कालीचरण' हिट हुई तो उनके लिए नए रास्ते खुल गए।
विज्ञापन

5 of 10
रीना रॉय - फोटो : सोशल मीडिया

हम जितेंद्र की बात कर रहे थे तो आप उनकी खाने को लेकर सख्ती की बातें बता रही थीं लेकिन संजीव कुमार तो बिल्कुल अलग रहे होंगे?
संजीव कुमार को खाने का बहुत शौक था। वह बोलते थे कि जो मन में आए सब खाओ। जब सेट पर आते थे तो सेट का पूरा वातावरण ही बदल जाता था। वह बहुत ही मजाकिया इंसान थे। सेट पर जब वह काम करते थे तो उनके चुटकुले शुरू ही रहते थे। ऐसे चुटकुले सुनाते थे कि पूरी टीम हंस हंस कर पागल हो जाती थी।

विज्ञापन

6 of 10
रीना रॉय - फोटो : Social media
और, अमिताभ बच्चन? बच्चन साहब के साथ 'अंधा कानून' और 'नसीब' की भी तमाम यादें हैं। वह समय के बहुत पाबंद शुरू से रहे हैं। उनके साथ जब शूटिंग होती थी तो सुबह चार बजे ही आंख खुल जाती थी। बच्चन साहब के आने से पांच मिनट पहले ही शूटिंग पर पहुंच जाना हमारा लक्ष्य रहता था। खाने के मामले में वह कुछ नहीं कहते थे। उनका अपना खाना भी घर से ही आता था।
विज्ञापन

7 of 10
रीना रॉय - फोटो : Social media
राजेश खन्ना की तो आप फैन रहीं और फिर उनके साथ काम करने का मौका भी मिला? हां, मैं फिल्मों में आने से पहले राजेश खन्ना की बहुत बड़ी फैन थी। फिल्मों में आई तो बस एक ही तमन्ना थी कि उनके साथ काम करने का मौका मिले। ऊपर वाले ने मेरी वह मुराद भी पूरी कर दी। उनके साथ शूटिंग के सारे लम्हे यादगार रहे हैं। जितेंद्र, राजेश खन्ना के अलावा फिल्म 'धर्म कांटा' में राजकुमार भी थे। वह जैसे परदे पर दिखते थे। असल जिंदगी में भी उनका वैसा ही बादशाहों वाला अंदाज रहता था। वह इकलौते ऐसे अभिनेता रहे जिनके सामने मेरी बोलती बंद हो जाती थी। उस फिल्म का मेरा गाना 'ये गोटेदार लहंगा' बहुत ही मशहूर हुआ था।
Box Office Report: 'अवतार 2' के सामने अब भी डटकर खड़ी है 'दृश्यम 2', रणवीर की सर्कस का बॉक्स ऑफिस पर खेल खत्म!

8 of 10
रीना रॉय - फोटो : Social media
गाने तो आपके तमाम हिट रहे हैं। परदेस जाके परदेसिया’ हो या फिर ‘शीशा हो या दिल हो....’ ‘..आखिर टूट जाता है’! ये गाने अब भी कहीं न कहीं बजते मिल जाते हैं। कानों में इनकी धुन पड़ती है तो बहुत अच्छा लगता है। मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे 'अर्पण' और 'आशा' में जे ओम प्रकाश जैसे निर्देशक के साथ काम करने का मौका मिला। उनकी फिल्में महिला प्रधान फिल्में होती थीं इसलिए इन फिल्मों में मेरे किरदार भी बहुत दमदार होते थे और उन फिल्मों ने कारोबार भी बहुत शानदार किया।

9 of 10
रीना रॉय - फोटो : Social media
फिल्म जगत ने आपको काफी कुछ सिखाया भी होगा, कुछ साझा करना चाहेंगी? धरमजी (धर्मेंद्र) से मैंने सादगी सीखी। वह बहुत ही प्यारे और साधारण इंसान हैं। संयुक्त परिवार में रहने की बातें मैंने रामानंद सागर साहब के परिवार में देखीं। उनका पूरा परिवार साथ काम करता था। एक ही इमारत के अलग अलग तलों पर सारे लोग रहते थे। सागर परिवार उन दिनों सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात्रि का भोजन एक साथ ही करता था। इस आपसी प्रेम और एकता के चलते ही वह ‘रामायण’ जैसा धारावाहिक बना पाए।
विज्ञापन

10 of 10
रीना रॉय - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
और, कोई ख्वाहिश जो अधूरी रह गई हो? हां, इतने दिनों हिंदी सिनेमा में काम करने के दौरान एक अरमान हमेशा रहा और वह था दिलीप कुमार के साथ काम करने का। बस यही अरमान पूरा नहीं हो पाया। ऐसा नहीं कि उनके साथ काम करने के प्रस्ताव नहीं आए। कई ऐसी फिल्मों को लेकर बातें चलीं जिसमें दिलीप साब लीड रोल कर रहे थे, लेकिन बस किसी न किसी वजह से संयोग बन नहीं पाया।
Reena Roy: जब पहली ही फिल्म में डायलॉग भूलने की रीना रॉय को मिली थी ऐसी सजा, हाथ से निकल गईं कई फिल्में
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें