रत्ना पाठक शाह
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रत्ना पाठक ने एक बुक लॉन्च के मौके पर आगे कहा कि आरआरआर जैसी फिल्में आज बहुत लोकप्रिय हैं, लेकिन यह एक रिग्रेसिव फिल्म है। यह पीछे की ओर देखती है जबकि हमें आगे की ओर देखना चाहिए। हमें लगता है कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं वह अच्छा है, क्योंकि हम लोकतंत्र की जननी भारत का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे कहा, जब तक फिल्म निर्माता अपने काम को गंभीरता से नहीं देखेंगे, तब तक हमें आरआरआर जैसी फिल्में देखनी होंगी, लेकिन हमें आलोचना पसंद नहीं है। इससे हमारे अहंकार को चोट लगती है, यह माहौल इतने बड़े लोगों ने बनाया है और दुर्भाग्य से, हमने इसे स्वीकार कर लिया है।