शाहरुख अगर केजीएफ में होते तो दर्शक इसे नहीं स्वीकारते
ओम के लेखक राज सलूजा ने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए हालिया समय में फिल्मों के प्रति दर्शकों के झुकाव को लेकर बात करते हुए कहा कि 'दर्शक ही ये तय करते हैं कि उन्हें किसी स्वीकारना है और किसे नहीं। उदाहरण के लिए अगर आप केजीएफ में शाहरुख खान को लेते हैं तो दर्शक इसे पसंद नहीं करेंगे कि शाहरुख ऐसा कर सकते हैं, लेकिन अगर यश कर रहे हैं तो वह इसे स्वीकार रहे हैं'। क्योंकि पैन इंडिया दर्शक पहले ही ये बात मान चुके हैं कि दक्षिण भारतीय अभिनेता ऐसा कर सकते हैं।
बॉलीवुड और साउथ के एक्शन सीन को लेकर ओम के निर्देशक की राय
राज सलूजा ने यह भी कहा 'साउथ के एक्शन सीन बॉलीवुड से कहीं ज्यादा बिना लॉजिक के होते हैं लेकिन दर्शकों को उनके कंटेंट में मजा आता है'। 'जॉन ने सत्यमेव जयते और अटैक में इतने बेहतरीन स्टंट किए हैं लेकिन फिर भी दर्शक उन्हें स्वीकार करना नहीं चाहते हैं लेकिन हम जूनियर एनटीआर, यश और एक्टर रामचरण की स्वीकर करने के लिए तैयार हैं'।
'राष्ट्र कवच ओम' से है रॉकेट्री की टक्कर
फिलहाल आज 'राष्ट्र कवच ओम' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है, वहीं आर माधवन की फिल्म रॉकेट्रीः द नांबी नारायण भी आज ही रिलीज हुई है। ऐसे में दोनों फिल्मों में जबरदस्त टक्कर देखने को मिलने वाली है। अब ये तो दर्शक ही तय करेंगे कि उन्हें आदित्य का एक्शन पसंद आता है या फिर आर माधवन की रॉकेट्री।