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जब 'राम' बनना अरुण गोविल को पड़ गया था भारी, भगवान समझकर एक मां मांगने लगी थी बच्चे की जान की भीख

Sun, 19 Apr 2020 08:25 PM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
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Arun Govil - फोटो : Social Media
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में फिलहाल लॉकडाउन लागू है और सभी को घरों में ही रहने की हिदायत दी गई है। दूरदर्शन ने एक बार फिर से 1980 के दशक का लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक 'रामायण' का टेलिकास्ट शुरु किया है। इसे रामानंद सागर ने बनाया था। रामायण के आते ही इस शो ने एक बार फिर अपनी लोकप्रियता को साबित कर दिखाया है। जैसे ही ये शो शुरु हुआ इसने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये।
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Arun Govil and Dipika Chikhlia - फोटो : twitter
लोगों में उत्साह है इस शो से जुड़े कलाकारों और उनसे जुड़ी कहानियों के बारे में जानने का। हम आपको इस धारावाहिक से जुड़ी कुछ कहानियां बता रहे हैं। रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल ने बीबीसी को बताया, "मैंने अपना बचपन उत्तर प्रदेश के मेरठ  में गुजारा। मेरठ यूनिवर्सिटी से ही पढ़ाई की और 17 साल की उम्र में बिजनेस के सिलसिले में मुंबई आया था। लेकिन फिर मैंने अभिनय करने का मन बना लिया। शुरुआती दौर में मैंने कई फिल्मों में साइड हीरो का किरदार निभाया और फिर राजश्री प्रोडक्शन हाउस ने मुझे फिल्म 'सावन को आने दो' में ब्रेक दिया।"
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Arun Govil - फोटो : file photo
ये फिल्म बेहद कामयाब रही और इसके बाद से अरुण गोविल का उनका फिल्मी सफर शुरू हो गया। लेकिन लोकप्रियता उन्हें धारावाहिक 'विक्रम और बेताल' में महाराज विक्रमादित्य के किरदार से मिली। ये सापात्हिक धारावाहिक दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता था। अरुण गोविल कहते हैं, "इसी धारावाहिक के चलते मुझे मौका मिला रामानंद सागर से मिलने का क्योंकि ये सीरियल उनके बेटे प्रेम सागर बना रहे थे। मैं उनसे मिलने गया और मैंने कई सारे स्क्रीन टेस्ट दिए। रामानंद सागर जी ने मुझसे कहा कि तुम्हें हम लक्ष्मण या भरत के किरदार के लिए चुन लेंगे।"

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arun govil - फोटो : file photo
"मेरे मन में राम का ही किरदार था। लेकिन मैंने उनसे कहा कोई नहीं, आप जैसा उचित समझें। बाद में उनकी सिलेक्शन टीम और रामानंद जी ने कहा की हमें तुम्हारे जैसा राम नहीं मिलेगा।" राम का किरदार करने के बाद अरुण गोविल की जिंदगी बदल गई। लोग सार्वजनिक जगहों पर अरुण को देखते तो उनके पांव छूने लगते और आशीर्वाद मांगते। लोग उनको उनके किरदार से अलग नहीं देख पाते थे। अपनी पुरानी यादों को याद करते हुए अरुण कहते हैं, "मुझे याद है एक दिन मैं सेट पर टी-शर्ट पहन कर बैठा हुआ था। एक महिला आई और सेट पर काम करने वाले लोगों से पूछने लगी श्री राम कहां है। वो कह रही कि उसे मुझसे मिलना है" उसके गोद में एक बच्चा था। सेट पर काम करने वाले लोगों ने उसे मेरे पास भेज दिया।"
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arun govil - फोटो : social media
"पहले तो वो मुझे पहचान नहीं पाई फिर उसने मुझे कुछ देर तक देखा और रोते हुए अपना बच्चा मेरे कदमों में रख दिया। मैं घबरा गया। मैंने कहा 'आप ये क्या कर रही हैं। छोड़िये मेरे पैरों को।' उसने रोते हुए कहा 'मेरा बेटा बीमार है। ये मर जाएगा आप इसे बचा लीजिये।' मैंने उन्हें हाथ जोड़कर समझाया कि 'ये मेरे हाथ में नहीं है, मैं कुछ नहीं कर सकता। आप इसे अस्पताल ले जाइये।' मैंने उन महिला को कुछ पैसे दिए। मैंने भगवान से उनके बेटे को ठीक करने की प्रार्थना की और फिर समझाया और अस्पताल जाने को कहा।" "वो उस वक्त वहां से चली गई लेकिन तीन दिन बाद वो फिर आई। इस बार भी उसका बेटा उसके साथ था। उस महिला को देख मुझे विश्वास हो गया कि अगर हम परमात्मा पर विश्वास रखें और प्रार्थना करें तो वो जरूर सुनता है।"
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