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एहसान कुरैशी: बंद मुट्ठी लोगों की मदद करते थे राजू भाई

Wed, 21 Sep 2022 06:43 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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राजू श्रीवास्तव, एहसान कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया
एम्स में डॉक्टर राजू श्रीवास्तव का इलाज कर रहे थे और बाहर उनके प्रशंसक और मित्र उनकी सलामती के लिए दुआएं कर रहे थे। राजू श्रीवास्तव के काफी नजदीकी रहे एहसान कुरैशी ने उनकी सलामती के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया। तमाम लोगों की दुआएं, डॉक्टर के अथक प्रयास के बावजूद भी राजू श्रीवास्तव अपनी जिंदगी की आखिरी जंग हार गए। एहसान कुरैशी कहते है, 'मुझे तो एक घंटे तक यकीन ही नहीं हुआ कि राजू भाई अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने हंसी को जो आयाम और एक नई ऊंचाई दी है, उसे कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है। वह हमेशा हमारी यादों में रहेंगे।'
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राजू श्रीवास्तव, एहसान कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया
राजू श्रीवास्तव ने बड़े कठिन संघर्ष के बाद अपना एक अलग मुकाम बनाया था। एहसान कुरैशी कहते है, 'वह संघर्षरत कलाकारों की बहुत ही मदद करते थे। उनके घर या ऑफिस में जो भी जाता था, उसको बिना खाने खिलाए नही भेजते थे। बंद मुट्ठी वह लोगों की मदद करते थे।'राजू श्रीवास्तव जितने बड़े कलाकार थे। उतने ही जमीन से जुड़े हुए भी इंसान थे। अपने घर परिवार साथ-साथ उन्होंने लोगों की भी बहुत मदद की है। एहसान कुरैशी कहते है, 'मुंबई ओशिवारा में जब मैं घर ले रहा था। तब, मुझे पांच लाख रुपए कम पड़ रहे थे। मैंने राजू भाई को एक बार बोला, उन्होंने तुरंत पांच लाख दे दिए।'
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एहसान कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया
बॉलीवुड में अक्सर देखा गया है कि एक कलाकार अपने सामने दूसरे कलाकार को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता है। एहसान कुरैशी कहते है, 'राजू भाई हमेशा अपने साथी कलाकारों को साथ लेकर चलते थे। हमारी पहली मुलाकात 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के दौरान ही मुलाकात हुई थी। जो भी जोक्स वह लिखते थे, हम सबके साथ शेयर करते थे। मैं जो लिखता था,उनसे शेयर करता रहता था। वह मुझसे बहुत प्यार करते थे।
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राजू श्रीवास्तव, एहसान कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया
राजू श्रीवास्तव के पिता कवि रहे हैं। एहसान कुरैशी के बोलने का अंदाज उनके पिता से मिलता जुलता था। एहसान कुरैशी कहते, 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के दौरान राजू भाई ने एक बार मुझे अपने घर पर बुलाया और घर के सभी सदस्यों से मिलाया। उनके घर के लोग भी मुझे बहुत सम्मान देते हैं। मैं अक्सर राजू भाई के घर जाता था। वह मेरे भी घर आते थे। मैं उनसे कहता था कि जिस घर में रह रहा हूं। उसमे एक ईट आपका भी लगा हुआ। बहुत सारी यादें राजू भाई से जुड़ी हुई है। आज दिल को मारकर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दे रहा हूं। उनको कमी तो हमेशा रहेगी, लेकिन वह हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे।'
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