दो साल में 10 फिल्में, दो सुपर हिट, एक ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक फिल्म के तौर पर भेजी गई और एक अदाकारी में मील का पत्थर का तमगा जीत चुकी है। ये गुरुग्राम से मुंबई पहुंचे राज कुमार राव का एक लाइन का मौजूदा बायोडाटा है। अपनी फिल्म सिटीलाइट्स की जोड़ीदार पत्रलेखा के साथ रिश्तों को लेकर वह गंभीर हैं पर 34 साल की उम्र में शादी भी नहीं करना चाहते। दिल्ली में थिएटर और पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट से ऐक्टिंग सीखने वाले राजकुमार राव की इस साल भी कई फिल्में रिलीज होने वाली हैं। राजकुमार राव से एक खास मुलाकात।
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राजकुमार, किरदारों के चयन का आपका पैमाना क्या होता है? आपकी फिल्में देखकर लगता तो यही है कि आपका पैमाना लगातार बदलता रहा है?
- मेरा इकलौता पैमाना मेरी गट फीलिंग है। फिल्म मेरे दिल को छूनी चाहिए। अगर कोई किरदार मुझे भीतर से उत्साहित करता है तो मैं तुरंत हां कर देता हूं। दूसरे मेरे लिए निर्देशक की समझ को समझना भी बहुत जरूरी है। फिल्म दर्शकों को पसंद तो आनी ही चाहिए, साथ ही सिनेमा को दर्शकों की संवेदनशीलता को भी जरूर छूना चाहिए।
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Rajkummar Rao
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आप एक तरफ तो फन्ने खां जैसी कमर्शियल फिल्म करते हैं और दूसरी तरफ ट्रैप्ड, ओमर्टा और शाहिद जैसा सिनेमा। कितना मुश्किल होता है एक कलाकार के तौर पर खुद को इतना विस्तार दे पाना?
ज़ाहिर सी बात है जब आप एक ड्रामा फिल्म करते हो तो उसकी तैयारी अलग और थोड़ी ज़्यादा होती है दूसरी फिल्मों से। हर किरदार की अलग मांग होती है। शाहिद एक बायोपिक थी तो मुझे उनके परिवार के साथ काफी वक्त बिताना पड़ा। ट्रैप्ड काफी सीरियल और हकीकत के करीब का ड्रामा था। तो जिस तरह की चीज़ें उस किरदार के साथ हुई हैं, वह चीज़ें मुझे असल ज़िंदगी में करनी पड़ती हैं। मेरे लिए ये किरदार ही खुद मेरी प्रेरणा बनते हैं। मैं किसी किरदार को निभाने से पहले उसकी मनोदशा पढ़ने की कोशिश करता हूं।
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यानी कि आपके लिए हर किरदार उतनी ही मेहनत मांगता है जितना आपकी बतौर लीड हीरो पहली फिल्म लव, सेक्स और धाखा का किरदार। अब तक के किरदारों में सबसे मुश्किल कौन सा रहा?
वेब सीरीज बोस: डेड ऑर एलाइव में सुभाष चन्द्र बोस का किरदार करना मेरा अब तक का सबसे मुश्किल काम रहा है। इस रोल के लिए मुझे शारीरिक रूप से भी काफी बदलाव करने पड़े। इसके अलावा इसी साल मेरी एक और फिल्म आ रही है मेड इन चाइना। इस फिल्म में भी मैंने बहुत मेहनत की है, किरदार को समझने और उसका चोला पहनने में। इस फिल्म में मेरा किरदार एक गुजराती का है जिसके लिए मुझे गुजराती सीखनी पड़ी तो वह भी काफी मुश्किल था मेरे लिए।
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समय के साथ अब नए कलाकारों की लीग तैयार हो चुकी है। रणवीर, रणबीर, आयुष्मान.., आप खुद को इस कतार में कहां खड़ा देखते हैं?
मैं कभी भी अभिनय यानी कला को किसी प्रतियोगिता की तरह देखता ही नहीं हूं। मेरे लिए यह कभी भी यह कोई प्रतियोगिता न थी और न होगी। यह एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री है और यहां सबके पास अपना अपना काम है। सब अपनी अपनी जगहों पर अच्छा कर भी रहे हैं। मेरे लिए मेरी प्रतियोगिता खुद से है और मेरे निभाए गए किरदारों से। मेरा एक ही पैमाना है खुद को जांचने का अगर मैं एक अच्छे कलाकार की तरह आगे नहीं बढ़ रहा हूं तो कोई फायदा नहीं है मेरे एक्टिंग करने का।
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एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा के बाद आपकी कम से कम चार और फिल्में मेंटल है क्या, मेड इन चाइना, अनुराग बासू की फिल्म तुर्रम खां भी कतार में हैं। इतना काम करते हैं तो खुद के लिए वक्त कैसे निकालते हैं?
अपने लिए वाकई बहुत कम वक्त बचता है इन दिनों। लेकिन, काम ज्यादा होना अच्छा है। अगर आप काम ईमानदारी से करते हैं और टाइम मैनेजमेंट के बेसिक्स आपको पता हैं तो अपने और अपनों के लिए टाइम निकल ही आता है। मैं एक बार में एक ही फिल्म करता हूं। उसे खत्म करता हूं। थोड़े दिन का ब्रेक लेता हूं और फिर अगली फिल्म का काम शुरू कर देता हूं।
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रणवीर सिंह ने 33 की उम्र में शादी कर ली। 31 के वरुण धवन शादी की तैयारी में हैं। आप लंबे समय से पत्रलेखा के साथ रिश्ते मे हैं? तो क्या गुरुग्राम से भी जल्द बारात निकलने वाली है?
इस सवाल का जवाब पहले से तैयार करके रखने की मैं बहुत कोशिश करता हूं लेकिन अभी पता नहीं। सच कहूं तो मुझे वाकई नहीं पता कि मैं किस दिन या किस साल शादी के लिए खुद को तैयार समझूंगा लेकिन जिस दिन भी ऐसा होगा। मैं खुद इसका ऐलान करूंगा और किसी को इसके लिए यहां-वहां से पता करने की जरूरत नहीं होगी।
मुंबई में 10 साल गुजारने के बाद अब मुंबई कैसा लगता है?
आज से 10 साल पहले तो गुड़गांव भी वैसा नहीं था, जैसा आज का गुरुग्राम है। लेकिन, मुंबई तब भी वैसा ही था। पहली बार शहर आया तो किराये का घर देखने निकला। ब्रोकर ने जो भाड़ा बताया, उसे सुनकर तो मेरे होश ही उड़ गए। बहुत महंगा था तब ये शहर मेरे लिए। लेकिन इस शहर में एक कमाल की ऊर्जा है। ये आपको आज़ादी देती है। अवसर देती है और जिंदगी के सबक भी बहुत अच्छे से सिखाती है।