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EXCLUSIVE: बोले राजकुमार राव, ‘मेरे नाम से फिल्म बिकती है तो फिल्म अच्छी होने की जिम्मेदारी भी मेरी’

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राजकुमार राव, पंकज शुक्ल - फोटो : अमर उजाला
गुड़गांव में पढ़ाई करते हुए नाटकों का शौक पाल लेने वाले राजकुमार यादव अब हिंदी सिनेमा के राजकुमार राव हैं। 11 साल में ही उन्होंने कथानक आधारित सिनेमा का पोस्टर ब्वॉय बनकर ये भी जताया कि हिंदी सिनेमा में ‘अमोल पालेकर’ अभी और भी आते रहेंगे। राजकुमार से पंकज शुक्ल की एक्सक्लूसिव मुलाकात के कुछ अंश।
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राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
राजकुमार, 11 साल, 33 फिल्में, दर्जनों पुरस्कार। कितनी उम्मीदें रहती हैं अब खुद से और हर आने वाली फिल्म से?
मेरा मुकाबला अपने आप से है। मैं अपने पिछले हर रोल को ही अपनी अगली कसौटी मानता हूं। ये भी मानता हूं कि हर नई फिल्म से उम्मीदें होती हैं। और, इन उम्मीदों पर खरा उतरने की मैं पूरी कोशिश भी करता हूं। मेरे नाम से अगर फिल्म बिकती है तो फिर फिल्म अच्छी बने, मेरे चाहने वालों को पसंद आए, इसकी जिम्मेदारी भी मेरी ही है।
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रूही फिल्म का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘रूही’ का भौरा फिल्म ‘स्त्री’ के विकी से काफी अलग है, इन दोनों चरित्रों को इतना अलहदा रखने के पीछे क्या मंशा रही?
हां, दोनों को अलग अलग रखने के पीछे एक खास मकसद तो रहा है। आपने सही पहचाना कि भौरा की बोली, उसको बोलने का लहजा, उसकी वेशभूषा विकी से बिल्कुल अलग है। इन दोनों को बिल्कुल अलग पहचान देने के पीछे एक सोच ये भी काम कर रही थी कि कल को किसी फिल्म में अगर ये दोनों एक साथ परदे पर आएं तो लोगों को इन्हें साथ देखना अच्छा लगे।

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राजकुमार राव - फोटो : इंस्टाग्राम
हां, दोनों फिल्मों के निर्माता दिनेश विजन भूतों की एक दुनिया बसाने पर भी तो काम कर रहे हैं, तो क्या इस यूनीवर्स की अगली फिल्म ‘भेड़िया’ में विकी और भौरा भी दिखेंगे?
अभी तो इस बारे में कुछ भी मैं नहीं कह सकता और ये जल्दबाजी भी होगी, लेकिन होने को तो कुछ भी हो सकता है।
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राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जैसे गुड़गांव में मनोज बाजपेयी को देखकर अभिनेता बनने की ठानने वाला इतना बड़ा स्टार बन सकता है?
मैंने गुड़गांव (अब गुरुग्राम) में रहते हुए बहुत नाटक किए। स्टेज से मेरा लगाव था। दिल्ली आया तो यहां भी नाटकों से जुड़ा रहा। इसी दौरान मैंने मनोज बाजपेयी की ‘सत्या’ और ‘शूल’ जैसी फिल्में देखीं। मुझे लगा कि ये सब भी हो रहा है अभिनय की दुनिया में तो मैं पुणे गया, वहां अभिनय सीख और मुंबई आ गया। हां, इस बीच मैंने शाहरुख खान की फिल्में भी खूब देखीं। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी फिल्मों से भी मैंने काफी कुछ सीखा है।
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राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तो कह सकते हैं कि आपका आकर्षण शाहरुख से और अभिनय मनोज बाजपेयी से प्रेरित है? वैसे एक निर्देशक का कितना योगदान मानते हैं आप अपने अभिनय में?
परदे पर किसी किरदार को पेश करना निर्देशक की ही कल्पना होती है। वह किसी कहानी को लेकर एक अलग दुनिया गढ़ता है। बतौर अभिनेता हमारा काम उस निर्देशक की कल्पना में रंग भरना होता है।

 
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द व्हाइट टाइगर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपकी पिछली तीनों फिल्में ‘द व्हाइट टाइगर’, ‘लूडो’ और ‘छलांग’ कामयाब फिल्में रही हैं। इनमें से  ‘छलांग’ के निर्देशक हंसल मेहता का आपका साथ काफी लंबा रहा है, उनकी फिल्मों की कहानी सुनते हैं आप या बस अब फोन आते ही हां कर देते हैं?
हंसल मेहता के साथ काम करना बहुत सहज रहता है। उनके सिनेमा ने भी धीरे धीरे ही विकास किया है। वह खुद से सीखे हुए निर्देशक हैं इसीलिए उनके काम में बहुत सहजता और बहुत ठहराव है। उनके साथ मेरा एक अलग रिश्ता बन गया है। ये रिश्ता एक अभिनेता का अपने निर्देशक पर भरोसे का रिश्ता है। और, एक निर्देशक का अपने अभिनेता पर यकीन का रिश्ता है।

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रूही - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपने मनोज बाजपेयी के साथ जब पहली बार कैमरे का सामना किया होगा तो काफी सहारा उनसे मिला ही होगा, अब जब जान्हवी कपूर जैसे नए कलाकार आपके साथ काम करते हैं तो आप उनकी कितनी मदद करते हैं?
जान्हवी कपूर ने ये साबित किया है कि उन्हें मौका भले आसानी से मिला हो लेकिन उन्होंने अपने काम में कभी कोई कोताही नहीं बरती। सेट पर आप उनकी मेहनत और लगन देखकर हैरान हो सकते हैं। उनमें एक निर्माता या एक सुपरस्टार की बेटी होने का कोई नखरा नहीं है। वह शूटिंग के समय सब कुछ भूलकर सिर्फ अपने काम पर फोकस करती हैं। फिल्म ‘धड़क’ के बाद हमने उन्हें ‘घोस्ट स्टोरीज’ और ‘गुंजन सक्सेना’ में तरक्की करते देखा है। ‘रूही’ तक आते आते वह काफी परिपक्व हो चुकी हैं।
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रूही - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इधर कॉमेडी फिल्मों का दौर सा चल पड़ा है, आपकी आने वाली दोनों फिल्में ‘बधाई दो’ और ‘हम दो हमारे दो’ भी कॉमेडी फिल्में ही हैं, कुछ कहना चाहेंगे इस बारे में?
हां, कुछ ज्यादा ही कॉमेडी कर ली है मैंने हाल की फिल्मों में। आपने सही कहा और मुझे भी लगने लगा है कि मैं कैमरे के सामने का ड्रामा मिस करने लगा हूं। कहानी की नाटकीयता मुझे काफी पसंद आती है और मेरी कोशिश है कि जिन दोनों फिल्मों का आपने नाम लिया है, उनके बाद मैं कुछ ड्रामा फिल्में करूं।

यहां देखें पूरा इंटरव्यू:
https://www.facebook.com/watch/live/?v=733750870664630&ref=watch_permalink
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