राजकुमार राव की फिल्म 'न्यूटन' को पहले पायरेसी का शिकार बताया गया इसके बाद मेकर्स और फैंस के लिए एक और दिल तोड़ देने वाली खबर आ रही है। फिल्म को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए भेजा जा रहा है ये फिल्म यह फिल्म एक पिछड़े नक्सली इलाके में मतदान के मुद्दे पर बनाई गई है।
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दरअसल, बताया जा रहा है कि ये फिल्म ईरान की एक फिल्म को कॉपी कर बनाया गया है। न्यूटन से जुड़े कुछ ऐसे दावे भी सामने आ रहे हैं जिसमें फिल्म के कंटेंट के नकल का आरोप लग रहा है। कहा जा रहा है कि राजकुमार राव की मुख्य भूमिका वाली फिल्म की कहानी ईरानी 'सीक्रेट बैलेट' से प्रेरित है।
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- फोटो : SELF
हालांकि, 'न्यूटन' के निर्देशक ने इस तरह के आरोपों को खारिज किया है। फिल्म के कंटेंट को लेकर उठे ऐसे सवाल ऑस्कर अवॉर्ड में भारतीय दावेदारी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ईरानी फिल्म 'सीक्रेट बैलेट' को बाबक पयामी नेने डायरेक्ट किया था। यह फिल्म 2001 में रिलीज हुई थी।
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वैसे दोनों फिल्मों की कहानियां एक जैसे मुद्दे पर बनी है। दोनों की कहानी दूरदराज इलाके में चुनाव करवाने के दौरान की परेशानियों को बयां करती है। दोनों ही फिल्मों में अहम किरदार में एक सरकारी कर्मचारी है। जिसकी जिम्मेदारी विपरीत परिस्थितियों में सही ढंग से चुनाव करवाना है।
दोनों में दूसरा अहम किरदार एक सिक्योरिटी अधिकारी का है, जो हर कदम पर सरकार कर्मचारी को चुनाव ना कराने की बातें करता है।
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आपको बता दें कि 'न्यूटन' में राजकुमार राव ने पोलिंग एजेंट की भूमिका निभाई है, जो छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव कराता है। उसे हवाई जहाज से दूरदराज इलाके में पहुंचाया जाता है जहां उसकी मुलाकात आत्मा सिंह यानि कि पंकज त्रिपाठी से होती है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक सिक्योरिटी अधिकारी की भूमिका में हैं। जो चुनाव के इलाके को अच्छे तरीके से जानता है।
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इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए 'न्यूटन' के डायरेक्टर अमित मसुरकर ने कहा, 'न्यूटन किसी फिल्म से प्रेरित नहीं है ना ही यह रीमेक है। फिल्म की कहानी लिखने के बाद मेरे एक दोस्त ने मुझे 'सीक्रेट बैलेट' के बारे में बताया था। मैंने यूट्यूब पर ईरानी फिल्म के कुछ हिस्से देखे हैं, लेकिन मुझे लगता है वह हमारी फिल्म से काफी अलग है।
उन्होंने आगे कहा, 'उसमें एक लेडी पोलिंग अधिकारी वोटिंग कराती है। ईरानी फिल्म में एक रोमांटिंक एंगल भी है जो कि न्यूटन में नहीं है। मुझे पता था लोग दोनों फिल्मों की समानताओं पर बात जरूर करेंगे लेकिन मैं इसमें क्या कर सकता हूं। जब आप कुछ लिखते हैं, तब आप नहीं जानते कि कोई और भी ऐसी ही कहानी लिख चुका है।