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किस्से: थप्पड़ ने बदल दी थी राज कपूर की जिंदगी और जमीन पर सोने की वजह से दिया था जुर्माना

Tue, 02 Jun 2020 07:29 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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राज कपूर - फोटो : Social Media
हिन्दी सिनेमा के शोमैन कहे जाने वाले अभिनेता राज कपूर की आज पुण्यतिथि है। एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ-साथ राज कपूर एक कामयाब निर्देशक और निर्माता भी थे। तीन राष्ट्रीय पुरस्कार और 11 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले राज कपूर की दो फिल्मों ने कॉन्स फिल्म फेस्टिवल में धूम मचाई थी। राज कपूर की परवरिश और उन्हें स्टार बनाने में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर का बहुत बड़ा हाथ था। राज कपूर के करियर की शुरुआत एक थप्पड़ से हुई थी। 
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राज कपूर - फोटो : अमर उजाला
बॉम्बे टॉकीज के संस्थापक राजनारायण दुबे के पोते अभय कुमार ने बीबीसी से कहा था, 'मेरे दादा जी कहते थे कि बॉम्बे टॉकीज में जिसने भी थप्पड़ खाया, उसे सफलता मिली। राजकपूर को भी थप्पड़ पड़ा। राजकपूर फिल्म ज्वारभाटा कि शूटिंग कर रहे थे।'
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राज कपूर - फोटो : Social Media
उन्होंने बताया था, 'केदार शर्मा उस फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर थे। जब वो शूट पर क्लैप कर के शूट शुरू करने के लिए बोलते थे तब-तब राजकपूर कैमरे के सामने आकर बाल ठीक करने लग जाया करते थे। दो-तीन बार देखने के बाद केदार शर्मा ने उन्हें एक थप्पड़ लगा दिया। फिर उन्हीं केदार शर्मा ने अपनी फिल्म नीलकमल में राजकपूर को मधुबाला के साथ लिया। उस थप्पड़ ने राजकपूर की किस्मत ही बदल कर रख दी।'

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Raj Kapoor - फोटो : social media
कभी बिस्तर पर नहीं सोते थे
राज कपूर के बारे में एक और कहानी मशहूर है कि वो कभी बिस्तर पर नहीं सोते थे, हमेशा जमीन पर सोते थे। उनकी बेटी ऋतु नंदा ने बीबीसी को बताया था, 'राज कपूर जिस भी होटल में ठहरते थे, उसकी पलंग का गद्दा खींच कर जमीन पर बिछा लेते थे। इसकी वजह से वो कई बार मुसीबतों में फंसे। लंदन के मशहूर हिल्टन होटल में जब उन्होंने ये हरकत की तो होटल के प्रबंधकों ने उन्हें चेताया कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन जब उन्होंने दोबारा वही काम किया, तो उन्होंने उन पर जुर्माना लगा दिया। वो पांच दिन उस होटल में रहे और उन्होंने खुशी-खुशी पलंग का गद्दा जमीन पर खींचने के लिए रोज जुर्माना दिया।'
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raj kapoor and krishna kapoor
राष्ट्रीय पुरस्कार लेते हुए दौरा पड़ा
1988 में राज कपूर को 'दादा साहेब फाल्के' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जब वो सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में पुरस्कार लेने पहुंचे तो उन्हें दमे का दौरा पड़ा। राष्ट्रपति वेंकटरमण सारे प्रोटोकॉल तोड़ते हुए मंच से खुद नीचे उतर कर आए और उन्होंने राज कपूर को सम्मानित किया। राज कपूर को वहां से दिल्ली के एम्स अस्पताल ले जाया गया जहां वो कोमा में चले गए और  2 जून, 1988 को रात 9 बजे उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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