भारतीय सिनेमा के सबसे पहले शोमैन का खिताब पाने वाले राज कपूर अब एक किंवदंती हैं। उनके किस्से सिनेमा के हर चाहने वाले के पास हैं। जंजीर के सेट पर सिर्फ आवाज सुनकर अमिताभ बच्चन के सुपरस्टार बनने की भविष्यवाणी करने वाले राजकपूर की फिल्मों ने हिंदी सिनेमा को बेहतरीन संगीत, दमदार कलाकार और समाज के निचले तबके से जुड़ी सच्ची कहानियां दी हैं। आज उनकी पुण्यतिथि है। इस मौके पर आइए जानते हैं, राज कपूर निर्देशित उन 10 फिल्मों के बारे में, जिन्होंने सिर्फ भारतीय सिनेमा ही नहीं बल्कि विश्व सिनेमा को को एक नई दशा और दिशा दी। और, इन्हीं 10 फिल्मों ने परदे पर हिंदी सिनेमा की हीरोइन का रंग रूप भी बदल दिया। देखिए, आगे की स्लाइड्स में।
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Aag
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आग (1948)
राज कपूर की बतौर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पहली फिल्म रही आग। फिल्म की कहानी में राज कपूर का चेहरा जला हुआ है और वह कैसे जला इसी की कहानी पर फिल्म बनी है। फिल्म में नरगिस और प्रेमनाथ अहम किरदारों में हैं। बतौर निर्देशक राज कपूर ने अपनी पहली ही फिल्म में दिखाया कि वह कमर्शियल सिनेमा में भी सामाजिक मुद्दे उठाने की काबिलियत रखते हैं और प्रेम को उसके असली रंग में दिखाने के लिए रील लाइफ को रीयल लाइफ तक खींच ला सकते हैं।
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Barsaat
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बरसात (1948)
इस फिल्म से आर के स्टूडियोज को वह पहचान मिली जिसकी शायद राज कपूर को तलाश रही। यह फिल्म एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई। फिल्म में राज कपूर और नरगिस की जोड़ी ने कमाल कर दिया। फिल्म में प्यार के रिश्ते को दो अलग नजरिए से दिखाया है। राज कपूर ने बतौर निर्देशक अपनी दूसरी ही फिल्म से अपना झंडा भी हिंदी सिनेमा में गाड़ दिया और इसी फिल्म पोस्टर फिर आर के स्टूडियोज का लोगो भी बना।
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Awara
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आवारा (1951)
जिस फिल्म ने राज कपूर की शोहरत को भारत से निकालकर दुनिया भर में पहुंचाया, वह फिल्म रही आवारा। फिल्म एक कोर्ट सीन से शुरू होकर फ्लैशबैक में जाती है। इस फिल्म में राज कपूर एक चोर की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी जिंदगी की परिस्थितियों ने उसे चोर बनाया है। अमेरिकन न्यूज मैगजीन टाइम ने 2012 में इस फिल्म को दुनिया की 100 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में जगह दी।
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Shree 420
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श्री 420 (1955)
राजकपूर ने सामाजिक विषमताओं में हास्य का पुट डालकर इसे मनोरंजक लेकिन चुटीले तरीके से पेश करने का फन चार्ली चैपलिन से उधार लिया। आवारा के बाद श्री 420 में भी राजकपूर का यह प्रयोग कामयाब रहा। राज कपूर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में भी नरगिस और राज कपूर की ही जोड़ी है। फिल्म में नरगिस गरीब घराने की लड़की हैं, वहीं राज कपूर इलाहाबाद का एक लड़का है जो बम्बई में आकर नरगिस से मिलता है और धीरे धीरे चोर बन जाता है। दोनो कुछ अमीर लोगों के चक्कर में आकर गलती कर बैठते हैं।
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Sangam
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संगम (1964)
सिनेमा रंगीन हुआ तो राजकपूर के सपने भी रंगीन होने लगे। और, इन्हीं रंगीनियों में राजकपूर ने देखा एक ऐसी फिल्म का सपना जो उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। 1964 में आई राज कपूर निर्देशित यह फिल्म उनकी पहली कलर फिल्म है। इस फिल्म को उनकी सबसे उम्दा फिल्मों में भी गिना जाता है। प्रेम त्रिकोण वाली इस फिल्म राज कपूर, राजेंद्र कुमार और वैजयंती माला मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म काफी हद तक 1939 में आई विदेशी फिल्म गॉन विद द विंड पर आधारित है। संगम 60 के दशक में मुगल ए आजम के बाद दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है।
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Mera Naam Joker
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मेरा नाम जोकर (1970)
संगम की कामयाबी ने निर्देशक राज कपूर को कुछ और बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। दूसरों को हंसाने वाले कलाकार के भीतर कितना दुख भरा होता है, इसे परदे पर दिखाने के लिए राज कपूर ने इस फिल्म में सितारों की लाइन लगा दी। नरगिस से मोहब्बत कर दिल को घायल कर बैठे राज कपूर ने इस फिल्म में प्यार का पूरा फलसफा उड़ेल दिया। फिल्म को बनने में छह साल लगे। राज कपूर का घर, बंगला, दफ्तर सब गिरवी हो गया और दो इंटरवल वाली ये फिल्म 18 दिसंबर 1970 को रिलीज हुई तो फ्लॉप हो गई। राज कपूर को इस फिल्म ने पूरी तरह तोड़ दिया।
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Bobby
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बॉबी (1973)
मेरा नाम जोकर फ्लॉप हुई तो लोगों ने कहा, राज कपूर चूक गए हैं। लेकिन, समय के साथ खुद को बदलते रहने में यकीन रखने वाले हर कामयाब इंसान की तरह राज कपूर ने खुद को सदमे से बाहर निकाला। दूसरे किसी हीरो पर पैसे खर्च करने की बजाय बेटे ऋषि कपूर को हीरो बनाया और उसके साथ लॉन्च कर दी 16 साल की एक नई लड़की डिंपल। राज कपूर के बाकी सारे साथी भी फिल्म में साथ रहे। फिल्म रिलीज होते ही सुपर डुपर हिट रही। रिस्क लेने की इस कुव्वत ने राज कपूर को फिर से हिंदी सिनेमा में पहले से और ऊंचे स्थान पर स्थापित कर दिया।
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Satyam Shivam Sundaram
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सत्यम शिवम सुंदरम (1978)
बॉबी की कामयाबी ने दो काम किए। पहला तो यह कि राज कपूर का नए चेहरों पर भरोसा बढ़ा। दूसरा ये कि राजकपूर को हीरोइन के अंग प्रदर्शन में बॉक्स ऑफिस की कामयाबी दिखने लगी। राज कपूर इसे लेकर तमाम बार घेरे गए लेकिन उनका दबदबा ऐसा था कि सेंसर बोर्ड तक उन्हें झुककर सलाम करता था। बॉबी में डिंपल के बाद सत्यम शिवम सुंदरम में राज कपूर ने जीनत अमान को कामयाबी की सीढ़ी बनाया। फिल्म का म्यूजिक अपने समय का सबसे बड़ा हिट म्यूजिक साबित हुआ और फिल्म ब्लॉक बस्टर रही।
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Prem Rog
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प्रेम रोग (1982)
बॉबी और सत्यम शिवम सुंदरम में जब राज कपूर पर अपनी लीक से भटकने के आरोप लगे तो वह 1982 में लेकर आए विधवा विवाह का मुद्दा बहुत ही संजीदगी से उठाने वाली फिल्म प्रेम रोग लेकर। फिल्म ने पद्मिनी कोल्हापुरे को हिंदी सिनेमा में सुपरस्टार बना दिया और राज कपूर के निर्देशन पर टीका टिप्पणी करने वालों का मुंह बंद कर दिया, लेकिन बॉक्स ऑफिस को हीरोइन के अंग प्रदर्शन का नशा दिखा चुके राज कपूर का ये सामाजिक प्रेम बस अगले तीन साल तक ही चलने वाला था।
राम तेरी गंगा मैली (1985)
राज कपूर ने अपनी फिल्मों में हीरोइनों से जितना भी अंग प्रदर्शन कराया, वह सब उनके निर्देशन में बनी आखिरी फिल्म राम तेरी गंगा मैली में फीका पड़ गया। एक नई हीरोइन मंदाकिनी को सूत की साड़ी में कश्मीर के झरने के नीचे खड़ाकर नहला देने वाले राज कपूर की इस फिल्म को लेकर बहुत थू थू हुई। थू थू सेंसर बोर्ड की भी हुई, लेकिन फिल्म सुपरहिट होनी थी तो हो गई। इस फिल्म में राज कपूर ने अपने बेटे राजीव कपूर को हीरो लिया था, लेकिन फिल्म में मंदाकिनी की चर्चा इतनी हो गई कि राजीव कपूर का करियर शुरू होने से पहले ही बिगड़ गया।