राजकपूर की फिल्मों को भारत में हाथों-हाथ लिया गया। लेकिन जब वह अपनी फिल्म आवारा के प्रीमियर के लिए मास्को पहुंचे तो वहां कुछ ऐसा हुआ कि राजकपूर एक ही रात के बाद मास्को से भारत लौटने की तैयारी करने लगे। बात लगभग पचास के दशक की है। मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में पहली बार भारत को शिरकत करने का मौका मिला था।
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Shree 420, Raj Kapoor
- फोटो : RK Studio
प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख सदस्य थे ख्वाजा अहमद अब्बास, बिमल रॉय, राज कपूर, देव आनन्द और सलिल चौधरी। राज कपूर की 'आवारा' कुछ ही समय पहले रिलीज हुई थी और भारत में उसे खूब लोकप्रियता प्राप्त हो रही थी। राज को विश्वास था कि देश की तरह विदेश में भी दर्शकों द्वारा उसे पूरा समादर मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय फलक पर वह पर्याप्त नाम कमा सकेगी। प्रतिनिधि-मंडल जब मास्को पहुंचा तो औपचारिक रूप से उसकी आवभगत की गई।
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सुप्रसिद्ध होतेल मस्क्वा में उन लोगों को ठहराया गया, रूस के संस्कृति-मंत्री द्वारा प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया और उनके मास्को घूमने फिरने की पूरी व्यवस्था की गई। फिल्म समारोह चूंकि दो दिन बाद शुरू होने वाला था इससे मॉस्को के गली-कूचों, वहां की सांस्कृतिक धरोहरों, वहां की कलादीर्घाओं और वहां के जनसामान्य को देखने-परखने, उनसे बातचीत करने का पर्याप्त समय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के पास था।
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उस समय का अपेक्षित उपयोग भी उन लोगों ने किया। लेकिन राज कपूर को यह सब कार्यक्रम रिझा नहीं पाए। काफी मेहनत से उन्होंने 'आवारा' बनाई थी। उनको इस बात की पूरी उम्मीद थी कि न केवल फिल्म वहां यथोचित लोकप्रियता हासिल करेगी, बल्कि खुद उनको भी वहां के लोग हाथों-हाथ लेकर उनकी अभ्यर्थना करेंगे। लेकिन उन दो दिनों में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिल पाया। न कोई भीड़ जुटी और न उनसे हाथ मिला कर कृतज्ञता-ज्ञापन करने वाले किसी समूह से उनका सामना हो पाया।
इस घटना से हताश और निराश होकर राज ने यह कहना शुरू कर दिया कि वहां रुकने में अब उनका कोई फायदा नहीं है और उन्हें अपने देश लौट जाना चाहिए। बिमल दा और ख्वाजा साहब जैसे अनुभवी साथियों ने उन्हें यह समझाने की कोशिश भी की कि कम से कम एक दिन का इंतजार तो वह कर लें, लेकिन वह अपनी पुरानी रट में लगे ही रहे। फिर आई वह शाम जब 'आवारा' का प्रदर्शन होना था। दर्शक राज कपूर के ऐसे दीवाने हो उठे कि होटल में घुसना मुश्किल था। प्रवेश मार्ग 'आवारा' के गीत-संगीत से झूम रहा था !
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