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Death Anniversary: पांच हजार शेर याद करो फिर बनना शायर, जब राहत इंदौरी को एक मुशायर ने दिया था चैलेंज

Fri, 11 Aug 2023 01:16 PM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

राहत इंदौरी ने वर्ष 2020 में दिल का दौरा पड़ने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। आइए आज उनकी तीसरी पुण्यतिथि पर उनके जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं। 
 
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राहत इंदौरी - फोटो : अमर उजाला
बेहतरीन शायर और मशहूर कवि राहत इंदौरी ने अपनी शायरी से दुनियाभर में मोहब्बत का पैगाम दिया। हालांकि, 1 जनवरी 1950 को इंदौर में जन्मे इंदौरी साहब वर्ष 2020 में कोरोना से संक्रमित हो गए। कवि को तत्काल प्रभाव से अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उन्हें 11 अगस्त को 77 की उम्र में हार्ट अटैक आया, जिसके कारण दिग्गज शायर ने आखिरी सांस लेकर दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। इंदौरी साहब की आज तीसरी पुण्यतिथि है। शायरी के साथ-साथ कुरैशी ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गीत दिए। आइए आज इस महान आत्मा की पुण्यतिथि पर इनसे जुड़े कुछ अहम बिंदुओं पर गौर फरमा लेते हैं- 
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राहत इंदौरी - फोटो : सोशल मीडिया
अपनी शायरी से हर उम्र के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे राहत इंदौरी का शेर 'किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है' काफी वायरल हुआ था। इसके अलावा बुलाती है मगर जाने का नहीं... आज भी हर किसी की जुबां पर रहता है। इंदौरी साहब को मोहब्बत का शायक भी कहा जाता था। लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद्द में, यहां पर सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है...जैसे तमाम बेहतरीन शेर लिखने वाले इंदौरी साहब ने प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से ली थी। राहत कुरैशी ने वर्ष 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज स्नातक और 1975 में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया। एमए के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की डिग्री ली। बेहद कम लोग जानते हैं कि राहत कुरैशी, शायर बनने से पहले देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्रध्यापक रहे थे।
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राहत इंदौरी - फोटो : सोशल मीडिया
राहत इंदौरी को पढ़ाई के समय से ही शायरी का काफी शौक था। एक दफा इंदौर में मुशायरा हुआ, जिसमें देशभर के तमाम दिग्गज शायरों ने शिरकत की। इसी दौरान राहत कुरैशी, एक मकबूल शायर के पास डरते-डरते पहुंचे। उनसे आटोग्राफ मांगा। साथ ही अपनी एक दिली इच्छा जाहिर करते हुए सवाल पूछा कि मैं शायर बनना चाहता हूं। इसके लिए क्या करना होगा? यह सुनकर दिग्गज शायर का जवाब आया कि मियां, पहले पांच हजार शेर याद कर लो फिर इस दिशा में आगे बढ़ने की सोचना। यह सुनते ही राहत कुरैशी तपाक से बोल उठे, 'जनाब! इससे ज्यादा तो अभी याद हैं।' फिर मकबूल शायर ने कहा तो देर किस बात की शुरुआत कीजिए। 

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राहत इंदौरी - फोटो : सोशल मीडिया
राहत कुरैशी ने अपने सपनों का पीछा करने की ठानी। साथ ही पूरी शिद्दत के साथ मंजिल तक पहुंचने के रास्ते पर निकल पड़े। राहत ने आसपास के इलाकों में मुशायरा शुरू किया। वह इस कदर शमां बांधते कि लोग अपने आप उनकी शायरी की लाइनों से जुड़ने लगते। राहत को अपने शहर से भी बेशुमार प्यार था, जिस कारण उन्होंने अपना नाम राहत कुरैशी से राहत इंदौरी कर लिया। वह चाहते थे कि जहां तक उनकी शायरी पहुंचे, वहां तक उनके शहर का भी नाम हो। 
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राहत इंदौरी - फोटो : सोशल मीडिया
इंदौरी साहब ने न सिर्फ बेहतरीन शायरियां लिखीं, बल्कि हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गीत भी दिए। 'बुंबरो', 'नींद चुराई मेरी किसने ओ सनम तूने', 'दिल को हजार बार रोका रोका रोका', 'चोरी चोरी जब नजरें मिलीं' जैसे गाने राहत इंदौरी की कलम से लिखे गए थे। इस महान शायर और लेखक ने भले ही दुनिया को अलविदा कह दिया है, लेकिन वह अपने शानदार काम से हमेशा फैंस के दिलों में जीवित रहेंगे। 
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