राघव जुयाल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके डैडी पेशे से वकील हैं। जब आपने अभिनय करने का फैसला लिया तो उन्होंने टोका तो होगा?
वह तो हर मां बाप करते ही हैं। मैं उत्तराखंड से हूं। मेरा आधा खानदान फौज में है, बाकी आधा दूसरी सरकारी नौकरियों में। घर वाले यही सोच रहे थे कि ये क्या करने जा रहा है। डांस और नाटक करने के जह से घर में मार भी खाई लेकिन उसी मार ने मुझे एक्टर बना दिया। फिल्म लाइन की समझ घरवालों को तब शायद उतनी नहीं थी। लेकिन, अब जब कुछ बन गया हूं तो सबने मुझे स्वीकार कर लिया है। मुंबई में रहकर भी मैं अपने उत्तराखंड की संस्कृति से जुड़ा हुआ हूं। ये संस्कार हर क्षेत्र में काम आते हैं। हम पहाड़ी लोग बहुत ही साधारण तरीके से रहते हैं। और, ये सब बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद है।