जनहित में जारी ट्रेलर लॉन्च इवेंट
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिर कैसे पता चला पिताजी को कि राज राइटर बन गए हैं? राज शांडिल्य बताते हैं, ''तब तक मेरे पिताजी को पता नहीं था कि मैं मुंबई आ गया हूं। जब मैंने उन्हें अपने पहले चेक के बारे में बताया तो उन्होंने पूछा कि मुंबई क्या कर रहे हो? मैंने कहां कि यहां मैं लेखन का काम कर रहा हूं और मुझे पहला चेक 22 हजार रुपये का मिला है तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि सिर्फ लिखकर कोई 22 हजार कमा सकता है। बोले, राइटिंग में इतना पैसा कहां मिलता है। उन्होंने इसकी फोटोकॉपी कराकर फैक्स करने तक को कहा। फिर फैक्स में मेरे नाम का चेक देखकर उन्हें किसी तरह तसल्ली हुई।’