गुरुदत्त
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निर्देशक अबरार अल्वी फिल्म प्यासा की कहानी लिख रहे थे, तो उनको फिल्म में एक संघर्षरत कवि की कहानी पर आधारित लिखना था जो देश की आजादी के बाद अपने काम को लोगों के बीच पॉपुलर बनाना चाहता है। फिल्म 'प्यासा' के शुरुआती दिनों में यह फैसला लिया गया था कि फिल्म की कहानी किसी कोठे पर आधारित होगी। लेकिन इसमें एक दिक्कत थी, गुरु दत्त कभी कोठे पर नहीं गए थे।